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प्यार की कीमत फिक्स करने का आदेश रद्द

Mon, 26 Aug 2013 12:05 AM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Mon, 26 Aug 2013 12:05 AM IST
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supreme court judgment in love marriage

भागकर विवाह करने वाले एक हिन्दू-मुस्लिम जोड़े को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत प्रदान करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें उनके प्यार की कीमत तय की गई थी।

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सर्वोच्च अदालत ने कहा कि नवविवाहिता को आर्थिक सुरक्षा देने के नाम पर पति विनीत को ढाई लाख रुपये बैंक में फिक्स कराने के आदेश का कोई औचित्य नहीं है। प्रेम विवाह करने वाले दंपति के बीच सुरक्षा के नाम पर कीमत तय करना उचित नहीं।
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हाईकोर्ट ने लड़की के परिजनों की ओर से दर्ज कराए गए अपहरण के मामले में पति की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के आदेश में यह शर्त रखी थी। एक माह में रकम न जमा कराने की सूरत में पति का जेल जाना तय था।
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जस्टिस एचएल गोखले की अध्यक्षता वाली पीठ ने दंपति की याचिका को अनुमति प्रदान करते हुए हाईकोर्ट के गत वर्ष 9 अगस्त के आदेश को दरकिनार कर दिया।

पीठ ने कहा कि गैर-धर्म में विवाह करने पर कोई रोक-टोक नहीं है और यह दो अलग धर्म के दो युवा लोगों से जुड़ी शादी का मामला है।

जब यह विवाह उनकी इच्छा से हुआ है और दोनों ही बालिग हैं। ऐसे में लड़की की आर्थिक सुरक्षा के लिए रकम तय करने का कोई औचित्य नहीं बनता।

सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि हाईकोर्ट ने दोनों के बालिग होने के दस्तावेजों और कानूनी तौर पर विवाहित होने के निष्कर्ष पहुंचने के बावजूद शर्तें निर्धारित कीं।

यह दंपति शीर्षस्थ अदालत में सुनवाई के दौरान मौजूद रही और पीठ ने खुद इस दावे को परखा कि दोनों किसी दबाव में एक-दूसरे के साथ नहीं रह रहे।

पीठ ने पति के खिलाफ लड़की के भाई की ओर से दर्ज कराई गई अपहरण की एफआईआर को भी रद्द कर दिया।

पति को ढाई लाख जमा कराने का दिया था आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पति (विनीत) को ढाई लाख रुपये की व्यवस्था कर मुस्लिम पत्नी (रुख्सार) के नाम पर बैंक में तीन साल के लिए फिक्स कराने का आदेश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने पत्नी को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के नाम पर कहा था कि यदि पति एक माह के भीतर ढाई लाख की रकम जमा कराने में असफल रहता है तो उसकी गिरफ्तारी पर लगी रोक हट जाएगी। साथ ही पति के खिलाफ मामला खत्म किए जाने का निर्णय भी हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया था।


नवविवाहित जोड़े के लिए ढाई लाख रुपये की यह रकम बहुत बड़ी थी क्योंकि पति ने हाल ही में सात हजार रुपये महीने पर एक नौकरी शुरू की और साथ जीने-मरने को तैयार इस दंपति के लिए यह रकम जुटाना संभव नहीं था।

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