तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
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सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी तहलका के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल की अंतरिम जमानत 27 जून तक बढ़ा दी।
जस्टिस जेएस खेहर व जस्टिस सी नागप्पन की पीठ ने यह कहते हुए अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाई कि उन्हें यह राहत पहले दी गई है। तेजपाल की ओर से पूर्व विदेश मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने बहस करते हुए कहा कि मां के निधन के बाद होने वाले कुछ धार्मिक संस्कार होने बाकी हैं तथा अंतरिम जमानत कम से कम और तीन सप्ताह बढ़ाई जाए।
इस पर पीठ ने कहा कि हमें इसका एक अच्छा कारण बताइए कि उन्हें अंतरिम जमानत क्यों नहीं दी जानी चाहिए। लालफीताशाही के चलते वह अपनी मां के संस्कार में हिस्सा नहीं ले सके और अदालत को उसके बदले में कुछ करना चाहिए।
तेजपाल की अर्जी का गोवा पुलिस ने किया विरोध
पीठ ने यह टिप्पणी गोवा पुलिस के अधिवक्ता की ओर से तेजपाल की अर्जी पर किए गए उस विरोध पर की, जिसमें कहा गया कि आरोपी को जेल के भीतर सिम कार्ड का इस्तेमाल करते पाया गया और ऐसे आरोप हैं कि उसने मामले में जांच अधिकारी को धमकाया और पीड़िता की मां को प्रभावित करने का प्रयास किया।
हमारे पास आरोपी की अर्जी का विरोध करने के लिए ठोस आशंकाएं और कारण हैं। पीठ ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि तेजपाल इस मामले में ट्रायल कोर्ट में पेश हो रहे थे। याद रहे कि बलात्कार के आरोप में जेल में बंद तेजपाल ने सोमवार को अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने का आग्रह सुप्रीम कोर्ट से किया था।
सहयोगी का यौन उत्पीड़न करने का मामला
पचास वर्षीय तेजपाल के खिलाफ गत वर्ष गोवा के एक होटल में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी कनिष्ठ सहयोगी के यौन उत्पीड़न और शील भंग करने के आरोप में पुलिस ने चार्जशीट दायर की है।
तेजपाल पर आरोप है कि उन्होंने अपनी महिला सहयोगी का सात नवंबर, 2013 को उत्पीड़न किया और अगले दिन फिर यह अपराध दोहराया। तेजपाल इस समय गोवा के वास्को शहर में सादा उपजेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद तेजपाल ने शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सर्वोच्च अदालत ने ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित मां की मौत की अंत्येष्टि में शामिल होने के आधार पर तेजपाल को जमानत दी है। इससे पहले अदालत ने दो बार उन्हें बीमार मां से मिलने की इजाजत दी थी।