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'संपत्ति के लिए विधवाओं को सताना बंद करें'

Tue, 29 Jul 2014 05:09 PM IST
Updated Tue, 29 Jul 2014 05:09 PM IST
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supreme court given an important order about dead husband assets

पति की मौत के बाद संपत्ति के लिए उसकी विधवा को परेशान किए जाने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

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सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि विधवा महिला को उसके पति के हिस्से से मिलने वाली जायदाद के लिए बेवजह परेशान करना बंद करें। यह अधिकार किसी को नहीं है। इस मसले पर कानून स्पष्ट है कि पत्नी और बच्चे ही दिवंगत पति या पिता के कानूनी वारिस हैं।
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सर्वोच्च अदालत ने मिथिलेश कुमारी और उनकी दो पुत्रियों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर यह टिप्पणी करते हुए तीनों को गिरफ्तार किए जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही यूपी सरकार समेत सात पक्षकारों से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
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दरअसल दिवंगत सूर्य प्रकाश गुप्ता की विधवा मिथिलेश और उनकी दोनों पुत्रियों के खिलाफ देवर राजेंद्र ने फर्जीवाड़ा करने समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी क्योंकि विधवा ने अपने पति के संपत्ति के हिस्से को बेचने की हिमाकत की थी।

यूपी सरकार को नो‌टिस

supreme court given an important order about dead husband assets

जस्टिस सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय व जस्टिस एसए बोबड़े की पीठ ने विधवा और उसकी पुत्रियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता डीके गर्ग से कहा कि जब संपत्ति के विवाद का सिविल मामला लंबित है, तो फिर पुलिस ने आपराधिक मामला कैसे दर्ज कर लिया। जवाब में अधिवक्ता ने कहा कि यह सब विधवा और उसकी पुत्रियों से संपत्ति हथियाने का हथकंडा है।

गर्ग ने कहा, ‘मेरे मुवक्किलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले राजेंद्र ने बड़े भाई की मौत के पांचवें दिन ही तहसीलदार के यहां फर्जी आवेदन किया कि मृतक का कोई कानूनी वारिस नहीं था। जब मेरी मुवक्किल मिथिलेश को इस बारे में मालूम पड़ा, तब उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई।’

उन्होंने बताया कि इसके बाद तहसीलदार की ओर से गत वर्ष 22 मार्च को संपत्ति बेचने पर अचानक रोक लगा दी गई। हालांकि इससे पहले उनके मुविक्कलों ने अपने हिस्से को बेच दिया था। इसके खिलाफ देवर राजेंद्र ने मिथिलेश व उनकी दोनों बेटियों के खिलाफ फर्जीवाड़ा करने समेत अन्य धाराओं में एफआईआर करा दी।

साथ ही सिविल जज के समक्ष दावा दाखिल कर दिया। वहीं एफआईआर के खिलाफ उनके मुवक्किलों की अर्जी को हाईकोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधवा को पति के हिस्से से मिलने वाली संपत्ति के लिए परेशान किया जाता है। जबकि कानून स्पष्ट है। पीठ ने विधवा और उसकी बेटियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार समेत सभी प्रतिपक्षों को नोटिस जारी किया।

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