सुप्रीम कोर्ट का सवाल सरकार से है: महाजन
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लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं देने के अपने निर्णय का नियमों और परंपराओं का हवाला देते हुए बचाव किया है।
उन्होंने कहा कि उनका फैसला सही है और सुप्रीम कोर्ट की विपक्ष के नेता के बिना लोकपाल की नियुक्ति के संबंध में की गई टिप्पणी का जवाब केंद्र सरकार को देना है। यह जवाब उन्हें नहीं देना है। उधर, कांग्रेस इस मुद्दे पर आक्रामक हो गई है।
कांग्रेस ने फिर लोकसभा स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे भाजपा की विपक्ष को बांटने की रणनीति का पता चलता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लोकसभा स्पीकर भी सवालों के घेरे में आ गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने किया हस्तक्षेप
उन्होंने कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के सवालों का जवाब सरकार या उसके अटार्नी जनरल को देना है। जहां तक किसी पार्टी को नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं देने के उनके निर्णय का सवाल है तो उन्होंने नियमों और परंपराओं का अध्ययन और विशेषज्ञों से सलाह के बाद यह फैसला लिया है।
उन्होंने तर्क दिया कि इसके आधार पर नेता प्रतिपक्ष का दर्जा पाने के लिए 543 सदस्यीय सदन में किसी दल के पास कम से कम दस प्रतिशत यानी 55 सदस्य होने चाहिए। आज तक इस नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष तो है ही और वह अपना काम करेगा। लेकिन लोकसभा में विपक्ष का नेता कोई नहीं है।
सुमित्रा ने 1980 और 1984 के उदाहरणों का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि तब लोकसभा में किसी विपक्षी दल के पास संख्या नहीं होने के कारण किसी भी दल को नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं दिया गया था। वहीं कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में हस्तक्षेप करने के बाद हमारी बात सही साबित हुई है। भाजपा इस मसले पर बांट डालो राज करो की राजनीति कर रही है।