फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Supreme Court dismissed Transfer petition against sachin

सचिन के खिलाफ सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Mon, 29 Oct 2012 08:17 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 29 Oct 2012 08:17 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court dismissed Transfer petition against sachin

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के राज्यसभा में मनोनयन को चुनौती देने वाली याचिका अपने पास स्थानांतरित करने की मांग को खारिज कर दिया। इस संबंध में एक पूर्व विधायक ने दिल्ली और इलाहाबाद में लंबित याचिकाओं को शीर्षस्थ अदालत में स्थानांतरित करने का आवेदन किया गया था।

विज्ञापन


इससे पहले भी इस मुद्दे पर सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा था। चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व विधायक राम गोपाल सिंह सिसौदिया की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता से कहा कि इस मामले को शीर्षस्थ अदालत में स्थानांतरित किए जाने की कोई जरूरत है।
विज्ञापन


ऐसा जरूरी नहीं है कि हर मामले को सीधे तौर सर्वोच्च अदालत लाया जाए। साथ ही पीठ ने स्थानांतरण याचिका को खारिज कर दिया। याद रहे कि उच्च सदन में सचिन के मनोनयन के खिलाफ दायर सिसौदिया की याचिका पर जस्टिस दीपक वर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


साथ ही कहा था कि अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका सीधे सर्वोच्च अदालत में क्यों दाखिल की गई। जबकि आप हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते थे। सीधे तौर पर यहां आकर तो आप खुद का नुकसान कर रहे हैं। इसके बाद पूर्व विधायक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर हुई। दोनों याचिकाओं को शीर्षस्थ अदालत स्थानांतरित करने की मांग सिसौदिया ने की थी।

हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं में कहा गया है कि अनुच्छेद 80 के तहत टीम इंडिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज को राज्यसभा में मनोनीत नहीं किया जा सकता। राज्यसभा में सिर्फ उन्हीं लोगों को मनोनीत किया जा सकता है, जिन्होंने विज्ञान, कला, साहित्य और भाषा के क्षेत्र में कुछ अलग हट कर किया हो।


याचिका में कहा गया है कि सचिन के पास ऐसी कोई योग्यता नहीं है, जिसके आधार पर उन्हें राज्यसभा सदस्य का पद दिया जाए। इसके बावजूद उन्हें राज्यसभा सदस्य के लिए मनोनीत किया गया है। उनका मनोनयन संविधान के प्रावधानों के मुताबिक नहीं है। इसलिए उनके मनोनयन को खारिज कर दिया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed