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'अगर क्रीम से कोई गोरा नहीं हो रहा तो हम क्या करें'

Mon, 16 Nov 2015 10:53 PM IST
Updated Mon, 16 Nov 2015 10:53 PM IST
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Supreme court denied to hear a case against a face cream company

कॉस्मेटिक्स उत्पादों और कॉस्मेटिक सर्जरी के भ्रामक विज्ञापन पर रोक लगाने और इस संबंध में दिशानिर्देश बनाने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके पास और भी काम है करने के लिए। अदालत ने याचिकाकर्ता को उचित फोरम (उपभोक्ता अदालत) का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा है।

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चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता डॉक्टर चंद्र लेखा शर्मा की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि पिछले कई सालों से एक क्रीम के प्रचार में यह दावा किया जा रहा है कि उस क्रीम को लगाने से लोग गोरे हो जाएंगे। अगर क्रीम लगाने से कोई गोरा नहीं होता तो इसमें भला अदालत क्या कर सकती है।

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उपभोक्ता फोरम का खटखटाएं दरवाजा

Supreme court denied to hear a case against a face cream company

पीठ ने कहा कि अगर इस तरह की याचिका को हम सुनने लगे तो ऐसे मामलों की भरमार हो जाएगी। कल कोई याचिका दाखिल कर कहेगा कि बाल उगाने वाले तेल लगाने के बावजूद उसके बाल नहीं आए। पीठ ने कहा कि अदालत के पास करने के लिए और भी काम हैं।

याचिका में कहा गया था कि आए दिन ऐसे विज्ञापन देखने को मिलते हैं जिनमें कॉस्मेटिक सर्जरी के जरिये अंग बेहतर करने के दावे किए जाते हैं।  बिना लाइसेंस के विज्ञापन के जरिये इस तरह के वायदे किए जाते हैं। कभी-कभी तो इस तरह की सर्जरी लोगों की जान पर बन आती है। यह संविधान के अनुच्छेद-21 (जीने के अधिकार) का उल्लंघन है। याचिका में इस तरह के विज्ञापन पर नियंत्रण लगाने की गुहार की गई थी।

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