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सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय से कहा आप अपनी इच्छा से जेल में हो

Tue, 04 Aug 2015 12:24 PM IST
Updated Tue, 04 Aug 2015 12:24 PM IST
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supreme court decision on sahara

सुप्रीम कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की मानवता के आधार पर रिहाई की अपील ठुकरा दी है। इस अपील पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि ‘आप अपनी इच्छा से जेल में हो।’ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि क्यों न संपत्तियों को बेचने के लिए एक रिसीवर नियुक्त कर दिया जाए। उधर, सेबी ने भी सुप्रीम कोर्ट मे अर्जी दायर कर कहा है कि सहारा की संपत्तियों पर रिसीवर नियुक्त किया जाना चाहिए।

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जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुब्रत रॉय को पूर्व में किए गए उस दावे की याद दिलाई जिसमें रॉय ने कहा था कि सहारा समूह के पास अपने निवेशकों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त परिसंपत्तियां हैं। जस्टिस ठाकुर ने कहा, ‘परेशानी वाली बात यह है कि उक्त व्यक्ति (रॉय) ने कहा था कि उसके पास 1,85,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां हैं। रॉय ने अदालत से कहा था कि उनके पास काफी धन है लेकिन जब इसके पांचवें हिस्से का भुगतान करने की बारी आई तो वह इसे नहीं कर पा रहे हैं। आपको अपनी संपत्ति के पांचवें हिस्से का ही भुगतान करना है। एक ऐसा आदमी जिसके पास इतनी सारी संपत्ति है वह अपनी आजादी का त्याग जेल में रहने के लिए कर रहा है और अपनी संपत्ति को नहीं छोड़ रहा है। आप अपनी इच्छा से जेल में हो।’
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अदालत की यह टिप्पणी तब आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सुब्रत रॉय के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पूरी नहीं हुई है, ऐसे में उन्हें जेल में रखना अदालत के लिए उचित नहीं है।
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गोरखपुर की जमीन की बिक्री को मंजूरी

supreme court decision on sahara

सहारा समूह की करीब 54 एकड़ जमीन के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इसकी कीमत 152 करोड़ लगाने पर गोरखपुर रीयल एस्टेट के निदेशक एवं उद्योगपति ओम प्रकाश जालान को इस मामले में कदम बढ़ाने की छूट मिल गई। इसके लिए 10 दिन में एमओयू तैयार करना होगा।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद जालान ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि पिछली सुनवाई में इस जमीन के लिए उनके मुकाबले में 150 करोड़ रुपये की बोली तक आए समृद्धि डेवलपर्स की तरफ से सोमवार की सुनवाई में कीमत इससे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया गया। इस पर उनके वकील की तरफ से 152 करोड़ रुपये में खरीद की पेशकश की गई, जिसपर कोर्ट ने सहमति जता दी।

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