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राजीव गांधी हत्याकांड में SC का बड़ा फैसला

Tue, 18 Feb 2014 02:02 PM IST
Updated Tue, 18 Feb 2014 02:02 PM IST
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supreme court commutes death sentence of rajiv gandhi's killers into life imprisonment

देश की सबसे बड़ी अदालत ने राजीव गांधी के हत्यारों को बड़ी राहत देते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। मुरुगन, पेरारिवलन और सांतन की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया है।

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इन तीनों हत्यारों ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की अपील की थी। 4 फरवरी को सु्प्रीम कोर्ट ने इस मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। केंद्र सरकार ने इन लोगों की फांसी की सजा पर राहत देने का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया था।

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केंद्र ने किया था विरोध?

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सुप्रीम कोर्ट में राजीव गांधी के तीन हत्यारों की सजा ए मौत को कम कर उम्रकैद में तब्दील करने संबंधी याचिका का विरोध किया था। मुरुगन, सांतन और पेरारिवलन ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि चूंकि राष्ट्रपति के पास उनकी दया याचिका पिछले 11 साल से लंबित है इसलिए उनकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाए।

इस दलील को सुप्रीम कोर्ट ने सही माना और उन्हें बड़ी राहत दी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बनाया था नजीर

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सभी आरोपियों ने उच्चतम न्यायालय के हाल के एक फैसले के बाद यह याचिका दायर की थी जिसमें अदालत ने विभिन्न मामलों के 15 कैदियों की फांसी की सजा राष्ट्रपति के पास दया याचिका के निपटारे में असाधारण देरी के कारण उम्र कैद में बदल दी थी।

सुनवाई के दौरान केंद, सरकार के वकील ने स्वीकार किया था कि तीनों की दया याचिका के निपटारे में देरी हुई है..लेकिन यह देरी अकारण और अविवेकपूर्ण नहीं है।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल के दौरान इन आरोपियों को न तो कोई मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी और न ही उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया है।

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राजीव गांधी हत्याकांड

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तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में 21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी। इस घटना में 14 अन्य लोगों की भी मौत हो गई थी। हत्या में लिट्टे का हाथ था।

1998 में स्पेशल कोर्ट ने आरोपी मुरुगन, सांतन, पेरारिवलन और मुरुगन की पत्नी नलिनी श्रीहरन समेत हत्याकांड के सभी 26 अभियुक्तों को मौत की सजा सुनाई।

मई, 1991 में सुप्रीम कोर्ट ने मुरुगन, सांतन, पेरारिवलन और नलिनी की मौत की सजा को बरकरार रखा जबकि अन्य की सजा कम कर दी थी।

नलिनी की सजा उम्रकैद में बदली

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जेल में ही नलिनी के लड़की पैदा होने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की सिफारिश की थी। 24 अप्रैल, 2000 को राज्य सरकार ने नलिनी की क्षमादान याचिका मंजूर करते हुए मृत्युदंड को आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया था।

19 मार्च, 2008 को प्रियंका गांधी ने अपने पिता की हत्या के दोष में वेल्लूर जेल में सजा भुगत रही नलिनी से मुलाकात की थी। प्रियंका और नलिनी के बीच मुलाकात एक घंटे तक चली थी। तब प्रियंका ने नलिनी से राजीव गांधी की हत्या के कारणों के बारे में पूछताछ की थी।

राष्ट्रपति ने खारिज की थी याचिका

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मुरुगन, सांतन व पेरारिवलन ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल की। 11 अगस्त 2011 को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने तीनों की दया याचिका खारिज कर दी।

26 अगस्त को गृह मंत्रालय की ओर से वेल्लूर जेल के अधीक्षक को मुरुगन, सांतन व पेरारिवलन की फांसी पर अमल का आदेश भी मिल गया था। 9 सितंबर, 2011 को फांसी देने की तारीख तय हुई।

29 अगस्त 2011 को एमडीएमके नेता वाइको ने फांसी की सजा को आजीवन करावास में बदलने को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने फांसी चढ़ाए जाने पर रोक लगा दी और मामले को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।

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