फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Supreme Court banned on AIPMT result

AIPMT के रिजल्ट पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, दोबारा हो सकती परीक्षा

Wed, 03 Jun 2015 10:27 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 03 Jun 2015 10:27 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court banned on AIPMT result

एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) के परिणाम की राह देख रहे विद्यार्थियों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जून को घोषित होने वाले एआईपीएमटी के नतीजों पर 10 जून तक के लिए रोक लगा दी है। कोर्ट इसी दिन यह तय करेगी कि परीक्षा दोबारा कराई जाए या नहीं।

विज्ञापन


इस वर्ष एआईपीएमटी में करीब 6.3 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। कुछ छात्रों ने याचिका दाखिल कर परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए दोबारा परीक्षा आयोजित करने की गुहार लगाई है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी पंत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को सुनवाई की अगली तारीख तक एआईपीएमटी का परिणाम घोषित नहीं करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि वह चाहता है कि सकारात्मक जानकारी मिले, जिससे वह फैसला ले सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या है पूरा प्रकरण

Supreme Court banned on AIPMT result

वहीं विशेष जांच दल की जांच में पता चला है कि इस पूरे प्रकरण में करीब 700 छात्रों को फायदा पहुंचा है। हालांकि अदालत ने हरियाणा पुलिस को एक हफ्ते का समय देते हुए कहा कि वह उन लोगों का पता लगाए जिन्हें वास्तव में इस पूरे प्रकरण से फायदा हुआ है। पीठ ने हरियाणा पुलिस को 10 जून को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।

पीठ ने कहा कि रिपोर्ट देखने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि परीक्षा दोबारा आयोजित होनी चाहिए या नहीं। पीठ ने कहा कि उसे पता है कि पांच जून को परिणाम आना प्रस्तावित है लेकिन हम चाहते है कि परीक्षा की पवित्रता बनी रहे। पीठ ने कहा कि हम सभी शंकाएं दूर करना चाहते है।

अदालत ने कहा कि वह जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहती है। हम नहीं चाहते कि किसी कार्रवाई की आलोचना हो। मालूम हो कि एआईपीएमटी परीक्षा में 123  सवालों के उत्तर मोबाइल के जरिए छात्रों तक पहुंचाए गए। जांच में पता चला है कि इस पूरे प्रकरण में 72 मोबाइल फोनों का इस्तेमाल हुआ। ये नंबर फर्जी पहचान पत्र के जरिए लिए गए थे। इन मोबाइल नंबरों से देश के विभिन्न हिस्सों में 358 कॉल्स किए गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed