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अब राजनीति में आया सांड, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

Wed, 23 Apr 2014 05:14 PM IST
Updated Wed, 23 Apr 2014 05:14 PM IST
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supreme court asked upa government why use bull fighting for vote bank politics

जाति, धर्म और विकास की राजनीति के चुनावी महासमर के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सांड़ पर सियासत करने को लेकर यूपीए-2 सरकार को जमकर खरीखोटी सुनाई।

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सर्वोच्च अदालत ने जलीकट्टू त्योहार में सांड़ को शामिल करने की छूट देने पर सरकार से कहा, यह निर्णय आपने वोट बैंक की राजनीति के चलते लिया है। इस जानवर को महज इसलिए खतरे में डाल दिया है क्योंकि सांड़ वोट नहीं डाल सकते हैं।
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निर्दोष जानवर का बचाव हर हाल में

supreme court asked upa government why use bull fighting for vote bank politics

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अदालत निर्दोष जानवर का बचाव हर हाल में करेगी। अदालत ने यह टिप्पणियां केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में पेश किए गए उस हलफनामे पर की, जिसमें कहा गया कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के चलते जलीकट्टू में भाग लेने के लिए सांड़ को प्रतिबंधित जानवरों की सूची से हटा दिया जाएगा।

जस्टिस केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सांड़ डर और यातना की वजह से जलीकट्टू में मैदान में दौड़ता है। कई वर्षों से इस तथ्य को और कानूनी प्रावधानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। सरकार भी नहीं ध्यान दे रही क्योंकि यह उनका वोट नहीं है।

'जानवर अपना ख्याल खुद नहीं रख सकते'

supreme court asked upa government why use bull fighting for vote bank politics

शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि इस खेल को जारी रखने के लिए कानूनी प्रावधानों की धुंधली तस्वीर पेश की जा रही है। जानवर अपना ख्याल खुद नहीं रख सकते। उनका ख्याल इंसान को ही रखना पड़ता है और ऐसे में अदालत उन्हें प्रताड़ना से बचाएगी।

समय की कमी के चलते पीठ ने इस मसले पर अगले सप्ताह विस्तृत सुनवाई कर आदेश जारी करने को कहा है। याद रहे कि सरकार ने हलफनामे में कहा था कि उसने 11 जुलाई, 2011 को एक अधिसूचना में उन जानवरों की सूची जारी की थी, जिन्हें प्रशिक्षण या प्रदर्शनी के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

इस सूची में सांड़ भी शामिल था। लेकिन जलीकट्टू के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत सांड़ो को इसमें भाग लेने की अनुमति प्रदान की जाएगी।

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