अब राजनीति में आया सांड, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
जाति, धर्म और विकास की राजनीति के चुनावी महासमर के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सांड़ पर सियासत करने को लेकर यूपीए-2 सरकार को जमकर खरीखोटी सुनाई।
सर्वोच्च अदालत ने जलीकट्टू त्योहार में सांड़ को शामिल करने की छूट देने पर सरकार से कहा, यह निर्णय आपने वोट बैंक की राजनीति के चलते लिया है। इस जानवर को महज इसलिए खतरे में डाल दिया है क्योंकि सांड़ वोट नहीं डाल सकते हैं।
निर्दोष जानवर का बचाव हर हाल में
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अदालत निर्दोष जानवर का बचाव हर हाल में करेगी। अदालत ने यह टिप्पणियां केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में पेश किए गए उस हलफनामे पर की, जिसमें कहा गया कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के चलते जलीकट्टू में भाग लेने के लिए सांड़ को प्रतिबंधित जानवरों की सूची से हटा दिया जाएगा।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सांड़ डर और यातना की वजह से जलीकट्टू में मैदान में दौड़ता है। कई वर्षों से इस तथ्य को और कानूनी प्रावधानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। सरकार भी नहीं ध्यान दे रही क्योंकि यह उनका वोट नहीं है।
'जानवर अपना ख्याल खुद नहीं रख सकते'
शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि इस खेल को जारी रखने के लिए कानूनी प्रावधानों की धुंधली तस्वीर पेश की जा रही है। जानवर अपना ख्याल खुद नहीं रख सकते। उनका ख्याल इंसान को ही रखना पड़ता है और ऐसे में अदालत उन्हें प्रताड़ना से बचाएगी।
समय की कमी के चलते पीठ ने इस मसले पर अगले सप्ताह विस्तृत सुनवाई कर आदेश जारी करने को कहा है। याद रहे कि सरकार ने हलफनामे में कहा था कि उसने 11 जुलाई, 2011 को एक अधिसूचना में उन जानवरों की सूची जारी की थी, जिन्हें प्रशिक्षण या प्रदर्शनी के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।
इस सूची में सांड़ भी शामिल था। लेकिन जलीकट्टू के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत सांड़ो को इसमें भाग लेने की अनुमति प्रदान की जाएगी।