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यूपी में शिक्षकों के कितने पद खाली हैं: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 03 Nov 2015 06:08 AM IST
Updated Tue, 03 Nov 2015 06:08 AM IST
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Supreme court asked UP government about vacant post of Teachers

उत्तर प्रदेश में भारी संख्या में शिक्षकों की पद रिक्त होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिरकार शिक्षकों के कितने पद रिक्त हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि स्कूलों में शिक्षक तो होने ही चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों के दावों की जांच करने के लिए कमेटी बनाने के लिए कहा है, जिनका कहना है कि सहायक अध्यापक की नियुक्ति के लिए शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित किए गए पैमाने पर खरा उतरने के बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं हुई है।

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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेसिक एजुकेशन, इलाहाबाद को कमेटी का गठन कर तीन हफ्ते के भीतर उन दावों की जांच करने के लिए कहा है। पीठ ने राज्य सरकार को कमेटी की जांच रिपोर्ट को वेबसाइट पर डालने के लिए कहा है। मालूम हो कि गत वर्ष 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सामान्य वर्ग में टीईटी में 70 फीसदी अंक और आरक्षित वर्ग में टीईटी में 65 फीसदी अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को शिक्षक नियुक्त किया जाए।
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सरकार ने दिया जवाब

Supreme court asked UP government about vacant post of Teachers

इससे पहले राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल गौरव भाटिया ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अब तक 43077 लोगों की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद नियुक्त की जा चुकी है। करीब 15 हजार लोगों की ट्रेनिंग जारी है और ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उनकी भी नियुक्ति हो जाएगी।

राज्य सरकार को 72825 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति करनी है। सरकार ने बाकी बचे नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित मानक में बदलाव करने की गुहार की। लेकिन कोर्ट ने फिलहाल किसी तरह का बदलाव से इनकार कर दिया। इसके अलावा पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई में इन मसले को विचार करेगी कि क्या शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी अंक ही एकमात्र पैमाना होना चाहिए? क्या एनसीटीई के दिशानिर्देश को सभी राज्य मानने के लिए बाध्य है? अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी।

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