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'क्या समान नागरिक संहिता चाहती है सरकार?'

Tue, 13 Oct 2015 09:02 AM IST
Updated Tue, 13 Oct 2015 09:02 AM IST
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Supreme Court asked question to government

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या वह देश में समान नागरिक संहिता लाने को इच्छुक है या नहीं। शीर्ष अदालत ने कहा कि  इसको लेकर भ्रम की स्थिति है।

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न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह समान नागरिक संहिता बनाने की दिशा में क्या कर रही है, जिससे कि विभिन्न धर्मों के कानूनी प्रावधान एक समान हों। पीठ ने कहा कि इसे लेकर भ्रम की स्थिति है। हमें समान नागरिक संहिता पर काम करना चाहिए।
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पीठ ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर हो क्या रहा है। अब तक क्यों नहीं नियम बनाया गया और क्यों नहीं इसका क्रियान्वयन हुआ।

मालूम हो कि पिछली सुनवाई के केंद्र सरकार ने कहा था कि वह तलाक अधिनियम की धारा-10 ए (1) में संशोधन करने के लिए तैयार है।

अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उस प्रावधान को चुनौती दी गई है जिसके तहत ईसाई दंपति को आपसी सहमति से तलाक लेने से पहले कम से कम दो वर्ष तक अलग रहने की अनिवार्यता है जबकि दूसरे धर्म के लिए एक वर्ष की अनिवार्यता है।
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सरकार को तीन हफ्ते में देना होगा जवाब

Supreme Court asked question to government

सोमवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि सरकार अधिनियम में संशोधन का प्रयास कर रही है। पीठ को यह बात नागवार गुजरी कि पिछले करीब तीन महीने से सरकार ऐसा कह रही है।

सरकार के रुख से खफा पीठ ने अदालत कक्ष में मौजूद सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार से इस बारे पूछा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह इस मामले से अनभिज्ञ हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ समय दिया जाए, जिससे वह पीठ की मदद कर सकें। जिसके बाद पीठ ने सॉलिसिटर जनरल को तीन हफ्ते के भीतर यह बताने के लिए कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार का क्या रुख है।

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