फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   supreme court asked question on sabrimala temple

महिला-पुरुष का भेद जब वेद-शास्त्रों में नहीं तो मंदिर में क्यों: सुप्रीम कोर्ट

Sat, 13 Feb 2016 06:03 AM IST
Updated Sat, 13 Feb 2016 06:03 AM IST
विज्ञापन
supreme court asked question on sabrimala temple

केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल के बीच की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मसले पर 6 हफ्तों के लिए सुनवाई टाल दी है।

विज्ञापन


शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार से कई सवाल भी पूछे। कोर्ट ने सवाल किया कि जब महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव का अंतर वेदों, उपनिषदों और किसी भी शास्त्र में नहीं है तो फिर सबरीमाला मंदिर में यह भेदभाव क्यों?
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर प्रशासन और सरकार से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर कब पांबदी लगी और मंदिर के पूरे इतिहास का ब्यौरा मांगा।

6 हफ्ते के लिए टली सबरीमाला पर सुनवाई

supreme court asked question on sabrimala temple

मंदिर प्रशासन ने सभी जानकारी और दस्तावेज उपलब्‍ध कराने के लिए 6 हफ्ते का समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन की अपील को स्वीकार कर मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार को 6 हफ्ते में जवाब देने को कहा है।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध स्‍थायी किया जा सकता है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट अब इस पर सुनवाई करेगा।कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई करेगा कि क्या महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को स्थायी किया जा सकता है या नहीं।

कोर्ट के मुताबिक धार्मिक स्वतंत्रता और समानता अधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए। कोर्ट का मानना है कि मंदिर एक धार्मिक स्‍थल है और इसे एक पैमाने के अंतर्गत होना चाहिए।

वहीं मंदिर प्रशासन का कहना है कि सबरीमाला की यह परंपरा हजार साल पहले से चली आ रही। सबरीमाला मंदिर में ही नहीं बल्कि पूरे सबरीमाला पर्वत पर महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है। मंदिर प्रशासन ने कहा कि अब कोर्ट इतने सालों बाद इस मसले को क्यों उठा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed