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क्या केंद्र कर सकता है कोल ब्लॉक आवंटन: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jan 2013 09:38 PM IST
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केंद्र सरकार की ओर से कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटित करने के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि केंद्र के अधिकार पर बहुत अधिक कानूनी स्पष्टीकरण की जरूरत है क्योंकि वैधानिक अधिनियम में सिर्फ राज्यों को ही नियत कार्य (आवंटन) का अधिकार प्राप्त है।
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सर्वोच्च अदालत ने कहा कि खदान एवं खनिज अधिनियम को केंद्र अनदेखा नहीं कर सकता है जिसमें उसे कंपनियों को कोल ब्लॉक आवंटित करने का अधिकार नहीं प्रदान किया गया है। जस्टिस आरएम लोढ़ा व जस्टिस जे. चेलामेश्वार की पीठ ने कहा कि सरकार अन्य प्रावधानों के तहत, खासकर कोयला खदान (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम के तहत पता लगाकर बताए कि उसे इन संसाधनों के आवंटन का अधिकार प्राप्त है क्योंकि केंद्र को खदान एवं खनिज (विकास एवं नियमन) अधिनियम 1975 के तहत कोई अधिकार नहीं प्राप्त है। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो इस अधिनियम से परे हो।
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सर्वोच्च अदालत ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि यदि अधिकार को अनदेखा किया गया है तो पूरे वैधानिक तंत्र को भी नजरअंदाज किया गया है। क्या आप अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों से परे जा सकते हैं। संभवत: कानूनी तौर पर यह बहुत ही संदेहजनक है। पीठ के सवाल पर अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने कहा कि उन्हें इस मसले पर जवाब देने के लिए समय चाहिए। शीर्ष अदालत ने केंद्र को इस पर जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।
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पीठ ने कहा कि आपके हलफनामे के मुताबिक खनिज और खनन के पट्टे राज्य सरकार जारी कर सकती है, केंद्र नहीं। इससे तो सभी आवंटन का रास्ता प्रभावित होता है। पीठ ने यह टिप्पणी अधिवक्ता एमएल शर्मा व तमाम नागरिक संगठनों के सदस्यों की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। याचिका दाखिल में घोटाले की जांच के लिए विशेष दल गठित करने की मांग की गई है।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम की धारा 10(1) में राज्य सरकार को आवंटन का अधिकार है। उपखंड 3 में यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार ही नियम कानून और पट्टे की अनुमति दे या रद्द करे। पीठ ने सरकार से यह भी पूछा कि कोयला ब्लॉक के आवंटनों का निर्णय स्क्रीनिंग समिति कैसे ले सकती है जिसकी जानकारी कोयला मंत्रालय के सचिव की ओर से दायर किए गए हलफनामे में दी गई है।
कोल ब्लॉक घोटाला मामले में सीबीआई को फटकार
कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में सीबीआई को बृहस्पतिवार को उस समय सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। जब एजेंसी ने घोटाले की जांच की सूचना शीर्ष अदालत से साझा करने की अनिच्छा जताई। कई करोड़ के इस घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के इस रवैये पर सर्वोच्च अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।
सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई अधिवक्ता की ओर से दिए गए उस कथन पर गहरा असंतोष जताया जिसमें कहा गया कि जांच की सूचना पर एजेंसी का सुरक्षित अधिकार है। ऐसे में जांच की सूचना को साझा नहीं किया जाएगा। जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर कहा कि अदालत को जांच की स्थिति पर गौर करके यह निश्चित करना है जांच सही दिशा में जा रही है या नहीं।
पीठ ने एजेंसी के अधिवक्ता से कहा कि यह अचरज कि बात है कि आप जांच की स्थिति को साझा नहीं करना चाहते। आपकी ओर से यह बहुत ही अजब सा बयान दिया गया है। यह कोई पहला मामला नहीं है और शायद आखिरी भी नहीं होगा जिसकी जांच पर शीर्ष अदालत निगरानी करेगी।