सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सरदारों पर बन रहे चुटकुलों पर कैसे लगाएं रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि न्यायिक दायरे में रहते हुए वेबसाइट्स पर सिखों पर चुटकुलों पर पाबंदी कैसे लगाई जा सकती है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और याचिकाकर्ता महिला वकील को इस संबंध में सुझाव देने के लिए कहा है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि आप चाहते है कि लोगों को संवेदनशील होने का निर्देश दिया जाए। आप इस संबंध में स्कूलों के लिए दिशानिर्देश बनाने की बात कह रहे हैं।
पीठ ने कहा कि अगर हम यह कहते हैं कि इस तरह के चुटकुले नहीं होने चाहिए लेकिन सवाल यह है कि हमारे इस आदेश का पालन कैसे होगा?
पीठ ने कहा कि हम नहीं चाहते है कि कोई आपका उपहास उड़ाए। कृपया हमें यह बताइए कि हम आपके लिए क्या कर सकते है। पीठ ने उन्हें छह हफ्ते में सुझाव देने के लिए कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा सुझाव
सुनवाई के दौरान दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि इस तरह के चुटकुलों से हमें चोट पहुंचती है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सिखों पर ही चुटकुलें बनते हैं। बिहारी और उत्तर पूर्व राज्यों के लोगों पर भी चुटकुले बनते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही उन पर चुटकुलें हमें मजा होता है कि लेकिन हम चाहते है कि हमारा मजाक न उड़ें।
उन्होंने यह भी कि सिखों का देश में बहुत योगदान रहा है। सिख राष्ट्रपति बने हैं, प्रधानमंत्री बने हैं। इतने में चीफ जस्टिस ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सिख सेनाध्यक्ष भी रह चुके हैं और जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी सिख होंगे। चीफ जस्टिस का इशारा जस्टिस जेएस खेहड़ की ओर था। न्यायमूर्ति खेहड़ फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के तीसरे वरिष्ठतम जज हैं।
शीर्ष अदालत महिला वकील हरविन्दर चौधरी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई केदौरान याचिकाकर्ता वकील ने पीठ केसमक्ष शिकायत की थी कि इन चुटकुलों की वजह से उन्हें विदेशों में अपमान सहना पड़ता है। उन्होंने कहा था कि इस तरह की शर्मिंदगी से बचने के लिए उनकेबच्चे अपने नाम के पीछे सिंह या कौर नहीं लगाने चाहते।