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‘बाली उमर’ के प्यार पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

Thu, 29 Jan 2015 11:28 AM IST
Updated Thu, 29 Jan 2015 11:28 AM IST
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supreme court approved unique love marriage case from uttar pradesh

रूढ़िवादी समाज से दो-दो हाथ कर शादी करने वाले एक प्रेमी युगल आखिरकार तीन साल बाद एक हो गए। यह मिलन किसी और ने नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने कराया है। इस मिलन में देरी की वजह युवती का नाबालिग होना था और यह बाधा हटते ही शीर्षस्थ अदालत ने इस प्रेमी युगल को साथ रहने की हरी झंडी दे दी।

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युवक और युवती उत्तर प्रदेश के बहराइच के रहने वाले हैं। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने महेश (काल्पनिक नाम) को अपनी प्रेमिका राधा (काल्पनिक नाम) के साथ वैवाहिक जीवन बिताने की इजाजत दे दी है। शीर्ष अदालत में मामला लंबित रहने तक युवती लखनऊ के नारी निकेतन में रह रही थी।
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बहराइच निवासी महेश और राधा का घर आमने-सामने था। राधा नाबालिग थी, जबकि महेश बालिग। महेश की उम्र उस वक्त करीब 21 साल की थी। दोनों में प्यार हुआ। बात शादी तक जा पहुंची। लेकिन, दोनों के घरवालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। आपत्ति की सबसे बड़ी वजह उनका अलग-अलग जाति का होना है।
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महेश दलित है जबकि राधा ब्राह्मण। इसके बाद दोनों ने अपना घर बसाने का निर्णय लिया और दोनों ने वर्ष 2011 में मंदिर में सात फेरे ले लिए।

युवती के घरवालों ने ‌भिजवाया जेल

supreme court approved unique love marriage case from uttar pradesh

यह बात युवती के परिवारवालों को बेहद नागवार गुजरी और शादी के करीब एक महीने बाद उन्होंने युवक के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद पुलिस ने महेश को हिरासत में ले लिया।

कई महीने सलाखों के पीछे बिताने के बाद आखिरकार महेश को जमानत मिल गई। राधा के यह कहने के बाद भी कि वह अपनी मर्जी से महेश के साथ गई थी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुकदमा निरस्त करने से इनकार कर दिया। लिहाजा महेश ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। महेश के वकील दुष्यंत पराशर ने युवक-युवती की पूरी कहानी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रख दी।

इसके बाद वर्ष 2013 में शीर्ष अदालत ने न केवल महेश के खिलाफ चल रहे मुकदमे पर रोक लगा दी बल्कि राधा को लखनऊ के नारी निकेतन में रहने का आदेश दिया। घरवालों की प्रताड़ना से बचाने के लिए अदालत ने ऐसा निर्णय लिया था।

इस महीने राधा बालिग हो गई। महेश के वकील पराशर ने यह जानकारी शीर्ष अदालत तक पहुंचाते हुए उसको बरी करने की गुहार लगाई। साथ ही उन्होंने दोनों की शादी को स्वीकृति प्रदान करने की गुहार की, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया।

जब जज ने प्रेमी से सज-धजकर आने को कहा

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गत 20 जनवरी को मामले की सुनवाई के वक्त जज ने अदालत कक्ष में मौजूद महेश से सज-धज कर आने के लिए कहा। महेश सफेद शेरवानी पहन अदालत पहुंचा। उस पर नजर पड़ते ही न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने कहा कि यह हुई न बात, अब यह दूल्हा लग रहा है।

उन्होंने महेश से पूछा कि क्या वह राधा को हमेशा खुश रखेगा। कभी उसे परेशान तो नहीं करेगा। महेश ने जब इस पर हामी भरी तो अदालत ने दोनों की शादी को मंजूरी दे दी। साथ ही अदालत ने कहा कि चूंकि युवती अब बालिग हो गई है, ऐसे में लड़के के खिलाफ मुकदमा जारी रखने का कोई मतलब नहीं है। अदालत ने महेश के खिलाफ चल रहे मुकदमे को भी निरस्त कर दिया।

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