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काले धन पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

Wed, 02 Apr 2014 07:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 02 Apr 2014 07:57 AM IST
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supreme court angry on central govt

विदेश में जमा कालेधन को वापस लाने में नाकाम रही केंद्र सरकार को विशेष जांच दल गठित करने के सुप्रीम कोर्ट के तीन साल पुराने आदेश को वापस लेने की मांग करना भारी पड़ गया।

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सर्वोच्च अदालत ने केंद्र के आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि आजादी के बाद से अब तक विदेशी बैंकों में जमा कुछ भारतीय नागरिकों के धन को वापस लाने के लिए सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। जबकि देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद होती जा रही है।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि 65 साल से भी ज्यादा समय में केंद्र सरकार विदेशी बैंकों में जमा कालेधन को वापस नहीं ला सकी।

'अदालत का सपना एसआईटी पूरा करेगी'

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जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरन से कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामियों पर गौर करने के बाद ही अदालत ने एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। यह कोई आम मामला नहीं है, 1947 से अब तक किसी ने भी देश से बाहर जमा कालेधन को वापस लाने के बारे में नहीं सोचा।

अदालत ने कहा कि देश का जो धन विदेशी बैंकों में जमा है, यदि उसे वापस लाया जाए तो देश की प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी हो सकती है, नागरिकों पर लगने वाला टैक्स 30 प्रतिशत कम हो जाएगा। पीठ में जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और जस्टिस मदन बी लोकुर भी शामिल थे।

सर्वोच्च अदालत ने सरकार के आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि हमें इसमें कुछ भी अच्छा नहीं दिखाई दिया। आप देखिएगा कि अदालत जो सपना देख रही है, उसे एसआईटी पूरा करेगी। सरकार कालाधन नहीं वापस ला पाई, लेकिन एसआईटी यह कर दिखाएगी।

2011 के बाद सरकार ने क्या किया?

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पीठ ने केंद्र से सवाल किया कि 2011 में अदालत ने इस मसले पर आदेश जारी किया था। उसके बाद सरकार ने क्या किया, आखिर आदेश जारी होने के तीन साल बाद भी कोई प्रगति क्यों नहीं हुई। आदेश जारी होने केबाद आपने प्रक्रियागत क्या कदम उठाए।

सिवाय सीलबंद लिफाफों में रिपोर्ट दाखिल करने के और कुछ भी नहीं किया गया। परासरन ने हालांकि दावा किया कि सरकार ने काफी कुछ किया है, जिसकी शुरुआत हसन अली और काशीनाथ तापुरिया से की गई है। जिन पर कथित तौर पर कालाधन एकत्र करने के आरोप हैं।

इस पर अदालत ने तंज कसते हुए कहा कि हम बहुत खुश हैं। हम पहले ही कह चुके हैं कि आप बस अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करते रहिए। मालूम हो कि शीर्ष अदालत ने 4 जुलाई, 2011 को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीपी जीवन रेड्डी के नेतृत्व में दस सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें उपाध्यक्ष के तौर पर जस्टिस एमबी शाह को भी शामिल किया गया था।

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कोर्ट अपनी जेब में नहीं रखना चाहता कालाधन

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सरकार की ओर से कालाधन वापस लाने के लिए विदेशों से संधियों को लेकर अपनी भूमिका को अहम करार दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत अपनी जेब में कालाधन नहीं रखना चाहती।

एसआईटी गठन सरकार की नाकामी पर किया गया है। वापस लाए गए धन का क्या करना है इस बारे में सरकार निर्णय लेगी और अदालत को बताएगी।

जेठमलानी की तारीफ की
अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी की ओर से कालाधन मामले में जनहित याचिका दायर कर केंद्र को ठोस कदम उठाने का निर्देश जारी करने के आग्रह की जमकर तारीफ की। पीठ ने कहा कि कम से कम एक व्य्कित तो है जिसने सरकार की नाकामी पर अदालत से हस्तक्षेप की गुजारिश की।

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