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दूध में मिलावट के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 27 Nov 2013 12:22 AM IST
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दूध में मिलावट के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों के लचर रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जताई।
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सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और महाराष्ट्र के खाद्य आयुक्तों को बुधवार को तलब किया है। इन आयुक्तों से अगली सुनवाई में जमीनी हकीकत जानने के लिए अदालत खुद सवाल करेगी।
सर्वोच्च अदालत ने केंद्र को राज्यों से सिंथेटिक दूध के मसले पर कोई कदम उठाने के बारे में न पूछे जाने पर नाराजगी जताई।
वहीं, राज्य सरकारों के जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने रिपोर्ट में साफ किया है कि 68.4 प्रतिशत दूध मिलावटी है। इसके बावजूद राज्यों ने अपने जवाब में मिलावट न होने का हवाला दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश सरकारों की ओर से सही जानकारी नहीं दी गई। इससे पहले जस्टिस केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता स्वामी अच्युतानंद तीरथ व अन्य के अधिवक्ता अनुराग तोमर से पूछा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम पहले से है। ऐसे में अदालत इस मसले पर क्या कर सकती है।
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जवाब में तोमर ने कहा कि एफएसएसएआई रिपोर्ट ने देशभर में दूध में मिलावट के प्रतिशत को स्पष्ट किया है, जिसमें वाशिंग पाउडर समेत अन्य हानिकारक पदार्थ दूध में मिलाए जाने के बारे में कहा गया है। तोमर ने कहा, इस रिपोर्ट से तो केंद्र सरकार भी इंकार नहीं कर सकती।
इसके बाद पीठ ने केंद्र से पूछा और सरकार ने रिपोर्ट के तथ्यों को स्वीकार किया। सरकार के जवाब पर अदालत ने कहा कि अब तक केंद्र ने इस मसले पर क्या किया। केंद्र ने कहा कि एफएसएसएआई की रिपोर्ट राज्यों को भेजी गई। इस पर पीठ ने कहा कि राज्यों ने इस पर कोई कदम उठाया या नहीं, क्या केंद्र ने इस बारे में राज्यों से कुछ पूछा है।
जवाब में केंद्र ने कुछ भी पूछे जाने से इंकार किया। सरकार की साफगोई पर अधिवक्ता तोमर ने कहा कि रिपोर्ट में सच्चाई सामने आने के बावजूद राज्यों ने अपने जवाब में मिलावट से साफ इंकार किया है। सर्वोच्च अदालत ने तब राज्यों से पूछा कि मिलावट के बारे में प्रदेश सरकारों का क्या कहना है।
इस दौरान दिल्ली व अन्य राज्यों ने अपने जवाब पर कायम रहते हुए मिलावट से इंकार किया। इस पर तोमर ने कहा कि रिपोर्ट में दिल्ली में 71 प्रतिशत दूध में मिलावट की बात कही गई है। तब पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट से इंकार नहीं कर सकतीं।