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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 214 कोल ब्लॉक आवंटन रद्द

Thu, 25 Sep 2014 12:03 AM IST
Updated Thu, 25 Sep 2014 12:03 AM IST
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Supreme Court judgement on Coal Blocks Allocation - Coal Scam

सुप्रीम कोर्ट ने 1993 से 2010 के बीच आवंटित 218 में से 214 कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया है। इन सभी आवंटनों को गैरकानूनी करार दिया गया है। निजी कंपनियों ने इन कोल ब्लॉकों पर लगभग तीन लाख करोड़ रुपये लगाए थे।

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सार्वजनिक कंपनियों के लिए आवंटित चार कोयला खदानों को छोड़ कर सभी खदानों का आवंटन रद्द होने से पहले ही ऊर्जा संकट से जूझ रही देश की अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है।
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सरकार को अब विदेश से महंगा कोयला आयात करना पड़ेगा। महंगे आयात पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होने से देश का चालू खाते का घाटा और बढ़ सकता है।

चीफ जस्टिस आर.एम. लोढ़ा, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ की नेतृत्व वाली बेंच ने अपने फैसले में एनटीपीसी और सेल की एक-एक और सासन में अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी दो कोल ब्लॉकों को छोड़ कर बाकी सभी 214 ब्लॉकों को रद्द कर दिया।
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बेंच ने यह भी कहा है कि कोल ब्लॉक लेने वाली जिन कंपनियों ने खनन का काम शुरू नहीं किया है उन्हें हर्जाना देना होगा। जिन्होंने खनन का काम शुरू कर दिया है, उन्हें अपना काम समेटने की लिए छह महीने का समय दिया गया है।

कोल ब्लॉकों को गैर कानूनी ठहराया

Supreme Court judgement on Coal Blocks Allocation - Coal Scam

इसके साथ ही बेंच ने कैग की उस जांच को स्वीकार किया है, जिसमें कहा गया था खनन का काम शुरू नहीं होने से सरकार को कोयले के हरेक टन पर 295 रुपये का घाटा हो रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने एनडीए सरकार के उस रुख का भी नोटिस लिया, जिसमें कहा गया था कि आवंटन रद्द होने से पैदा होने वाली किसी भी सामाजिक-आर्थिक असर से निपटने के लिए वह पूरी तरह तैयार है।

इससे पहले इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यूपीए सरकार ने कोयला खदानों को रद्द करने का विरोध किया था और कहा था कि आवंटन के बाद निजी कंपनियों ने इन पर दो लाख करोड़ रुपये (हालांकि यह अनुमान अब तीन लाख करोड़ रुपये का लगाया जा रहा है) लगाए हैं। लेकिन 25 अगस्त की सुनवाई में अदालत ने कहा था कि 1993 से 2010 के बीच विभिन्न सरकारों की ओर से कोल ब्लॉक के आवंटन गैरकानूनी और मनमाने थे।

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1993 से 2010 के बीच कोल ब्लॉक आवंटित करने में अपनाए गए हर तरीके से भर्त्सना की थी। पिछली सुनवाई में आवंटन रद्द करने के फैसले को टालते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब तक 36 स्क्रीनिंग कमेटियों के फैसलों से जिस तरह का आवंटन हुआ है उसके असर को संभालना ही असल मुद्दा होगा।

कैग की जांच पर मुहर

Supreme Court judgement on Coal Blocks Allocation - Coal Scam

नीलामी से पहले की व्यवस्था के तहत कोल ब्लॉकों का जिस तरह से आवंटन हुआ था उसे सुप्रीम कोर्ट ने तदर्थ और लापरवाह तरीके  से किया गया गैरकानूनी कदम करार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि बगैर दिमाग का इस्तेमाल किए इस आवंटन की वजह से सार्वजनिक हित प्रभावित हुए हैं और जनता को नुकसान पहुंचा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कैग की जांच रिपोर्ट पर मुहर लगा दी है। कैग ने कहा था कि मनमाने ढंग से कोयला खदान आवंटन की वजह से सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये का चूना लगा है। इन गैरकानूनी फैसलों की वजह से सरकार को कोयले के हरेक टन पर 295 रुपये का घाटा सहना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट ने जिन कोयला खदानों को रद्द नहीं किया, उनमें सेल और एनटीपीसी की एक-एक कोयला कोयला ब्लॉक शामिल हैं। इसके अलावा सासन की अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट्स के लिए भी दो कोल ब्लॉकों को छोड़ दिया है।

किसे पड़ेगी कितनी चोट
बैंकों को - 7.65 लाख करोड़ रुपये
कोल कंपनियां - 3 लाख करोड़ रुपये
शेयरधारक - 52,000 करोड़ रुपये

जुर्माना लगने से इन्हें होगा सबसे ज्यादा घाटा
जिंदल स्टील एंड पावर कंपनी. हिंडाल्को, एस्सार, रिलायंस पावर, भूषण स्टील

कोर्ट के फैसले से भाजपा संतुष्ट

Supreme Court judgement on Coal Blocks Allocation - Coal Scam

भाजपा रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोल ब्लॉक का आवंटन रद्द होना सरकार के रुख के मुताबिक ही है। दरअसल इस फैसले से भारत सरकार (मोदी सरकार) की ओर दाखिल किया गया शपथ पत्र सही साबित हुआ है। इस फैसले से अब इस मामले में हमें नई शुरुआत का मौका मिलेगा।

फैसले पर कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर कोल ब्लॉक आवंटन रद्द किए जाने से भाजपा की ओर से यूपीए सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर चलाया गया अभियान खोखला साबित हुआ है। 1993 से ही आवंटित ब्लॉक रद्द होने से साबित हो चुका है कि भाजपा इसमें शामिल थी। क्योंकि इस दौरान उसी का शासन था।

कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला

1993-2010 के बीच 218 ब्लॉक आवंटित किए गए।
केंद्र में सरकार और कोयला ब्लॉक का आवंटन
प्रधानमंत्री आवंटन काल आवंटन
मनमोहन सिंह 2004-11 175
अटल बिहारी वाजपेयी 1998-2004 32
एचडी देवगौड़ा 1996-97 4
पी.वी. नरसिम्हा राव 1993-96 5

कोयला मंत्रालय प्रभार
कांग्रेस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 2007-12
कांग्रेस डी.नारायण राव 2006-08
जेएमएम शिबू सोरेन 2004-07
टीएमसी ममता बनर्जी 2004
एलजेपी रामविलास पासवान 2001-02
भाजपा शहनवाज हुसैन 2001
भाजपा सुंदरलाल पटवा 2000-01
बीजेडी नवीन पटनायक 1998-2000

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