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सुप्रीम कोर्ट और मोदी सरकार आमने-सामने

Thu, 12 Mar 2015 12:13 PM IST
Updated Thu, 12 Mar 2015 12:13 PM IST
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supreme court and center face to face on judge appointment

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा है कि संसद द्वारा सर्वसम्मति से कोलेजियम प्रणाली की जगह राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग लाने का निर्णय इसकी वैधानिकता का एकमात्र आधार नहीं हो सकता है।

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अदालत ने कहा कि संसद द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए हर निर्णय को सीधे तौर पर मंजूर नहीं किया जा सकता और अगर इसे चुनौती दी गई तो न्यायिक परीक्षण किया जाएगा।
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न्यायमूर्ति एआर दवे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह तब कहा जब केंद्र की ओर से पेश अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी इस बात पर लगातार जोर दे रहे थे कि संवैधानिक संशोधन और राष्ट्रीय न्यायिक  नियुक्ति आयोग बनाने का निर्णय संसद ने सर्वसम्मति से लिया है।
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चुनौती दी गई तो न्यायिक परीक्षण किया जाएगा

supreme court and center face to face on judge appointment

इतना ही नहीं 20 राज्यों ने भी इस पर मुहर लगा दी है। पीठ ने सवाल किया कि फर्ज कीजिए अगर कल संसद संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) को हटाने का निर्णय लेती है तो क्या हम कह सकते है कि यह ठीक है क्योंकि संसद ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है।

पीठ ने कहा कि हम इससे इत्तेफाक नहीं रखते। इस पर अटार्नी जनरल ने एक बार फिर दोहराया कि कोलेजियम सिस्टम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता से नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग को वैधानिक चुनौती अभी नहीं दी जा सकती है।

अभी इसे सरकार ने अधिसूचित नहीं किया है। अधिसूचना जारी होने के बाद ही इसे चुनौती दी जा सकती है। अदालत ने सुनवाई अगले मंगलवार तक के लिए टालते हुए कहा कि कोई भी उच्च न्यायालय राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई न करें।

एससीबीए केंद्र सरकार के साथ

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने सुनवाई के दौरान कहा कि एसोसिएशन राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के पक्ष में है। वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन इसका विरोध कर रही है। मालूम हो कि एससीबीए एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन की पैरेंट बॉडी है।

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