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'आरोपियों के चुनाव लड़ने पर रुख स्पष्ट करे केंद्र'

Mon, 25 Nov 2013 11:47 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 25 Nov 2013 11:47 PM IST
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supreme court accused election central govt

गंभीर अपराध में आरोप तय होते ही चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से स्पष्ट रुख पेश करने को कहा है।

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सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि सरकार चुनावी प्रक्रिया में शुद्धता और लोकतंत्र को मजबूत करने की इच्छा रखती है तो ऐसा करना मुश्किल नहीं होगा।

वहीं केंद्र ने कहा कि कानून और गृह मंत्रालय की राय अलग होने की वजह से इस मुद्दे को विधि आयोग के पास समीक्षा के लिए भेजा जा चुका है।

जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि सरकार इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों की सहमति मिलने तक इंतजार करना चाहेगी। खासकर तब जबकि संसद की स्थायी समिति भी इस राय के खिलाफ है कि आरोप तय होते ही व्यक्ति के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए।

इस पर पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पारस कुहार से पूछा कि क्या सदस्यों की ओर से स्थायी समिति की राय को स्वीकार किया गया है या नहीं। क्योंकि समिति का विचार संसद का विचार नहीं है। सरकार हमेशा समिति की राय को स्वीकार नहीं करती, इसी वजह से हम जानना चाहते हैं कि समिति की राय पर सरकार का क्या कहना है।
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कुहार ने पीठ को सूचित किया कि स्थायी समिति इस मुद्दे पर पहले ही विचार कर चुकी है और सरकार की ओर से इस मुद्दे को विधि आयोग के समक्ष समीक्षा के लिए भेज दिया गया है। इस मसले पर कानून और गृह मंत्रालय की राय एक-दूसरे से अलग थीं।
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कानून मंत्रालय गंभीर अपराध के मामले में आरोप तय होते ही चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के पक्ष में तब थी लेकिन जिस आरोप में सजा की अवधि कम से कम सात साल हो। वहीं गृह मंत्रालय का कहना था कि दोषी करार दिए जाने के बाद ही चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जानी चाहिए।

याद रहे कि चुनाव आयोग ने हाल ही में अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि ऐसे उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर आरोप तय होते ही प्रतिबंध हो, जिनकी सजा की अवधि कम से कम पांच साल हो।


पीठ ने कहा कि सरकार और चुनाव आयोग इस मसले पर एकजुट होकर प्रयास क्यों नहीं करते। जबकि सब यह चाहते है कि चुनावों में शुद्धता हो। इसमें चिड़ पैदा करने वाली क्या बात है। आखिरकार इस पूरी सोच से लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी और यदि कुछ कदम उठाने से मजबूती मिल सकती है तो एक-दूसरे में सामंजस्य होना चाहिए।

हालांकि सर्वोच्च अदालत ने सरकार की ओर से विधि आयोग को समीक्षा के लिए भेजे गए मुद्दे पर स्पष्ट रुख देने के लिए समय प्रदान कर दिया है।

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