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पौरुष परीक्षण से घबराए नित्यानंद, कोर्ट ने कहा जरूरी

Fri, 22 Aug 2014 07:53 PM IST
Updated Fri, 22 Aug 2014 07:53 PM IST
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supreem court reserved his verdict in nityanand case

पौरुष परीक्षण के खिलाफ नित्यानंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। चार साल पुराने बलात्कार के एक मामले में स्वयंभू धर्मगुरु नित्यानंद का पौरुष परीक्षण कराए जाने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सुनवाई पूरी कर ली।

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जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली बेंच ने नित्यानंद की अपील पर सुनवाई के दौरान इस तरह के परीक्षण कराने के प्रति नित्यानंद की आनाकानी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि देश में बलात्कार के मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर ऐसा परीक्षण जरूरी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने नित्यानंद का पौरुष परीक्षण कराने के हाईकोर्ट के आदेश पर पांच अगस्त को रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में नित्यानंद और उनके चार अनुयायियों के खिलाफ रामनगरम की अदालत की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट पर एक अगस्त को रोक लगा दी थी।
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पौरुष परीक्षण को दी थी चुनौती

supreem court reserved his verdict in nityanand case

नित्यानंद के पौरुष परीक्षण का आदेश कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया था। जिसे नित्यानंद ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। धर्मगुरु से जुड़ा होने के कारण मामले की सुनवाई को लेकर लोगों में भी काफी उत्सुकता है।

सेक्स वीडियो से आए थे चर्चा में

supreem court reserved his verdict in nityanand case

साल 2010 में तब सनसनी मच गई थी जब दक्षिण भारत के एक टीवी चैनल ने एक एक्सक्लूसिव सेक्स वीडियो जारी किया जिसमें एक साधु जैसे दिखने वाले व्य‌िक्ति को दो महिलाओं के साथ आपत्तिजनक अवस्‍था में दिखाया गया।

लोग तब चौंक गए जब सीडी में दिखने वाला साधु बंगलौर के परमहंस नित्यानंद निकला। इसके बाद नित्यानंद सुर्खियों में आ गया।

नित्यानंद दुनिया के कई देशों में नित्यानंद ध्यानपीठ चलाते थे। सेक्स वीडियो सामने आने पर स्‍थानीय लोगों ने नित्यानंद ध्यानपीठ पर हमला किया और तोड़फोड़ की। तब ये साधु एकदम से विलेन में तबदील हो गया था।

मामले को बताते रहे साजिश

supreem court reserved his verdict in nityanand case

मामला गर्म होने पर नित्यानंद ने खुद को बचाने की काफी कोशिश की। उनके कई सहयोगियों ने मीडिया में आकर उनका सहयोग किया व मामले को पूरी तरह से साजिश करार दिया। इस कांड के बाद नित्यानंद कई दिनों तक फरार रहे।

इसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उनकी गिरफ़्तारी भी हुई. नित्यानंद के बारे में कहा जाता था कि वो लोगों को आध्यात्मिक मुक्ति का रास्ता दिखाने का दावा करते थे।

वो सभी आरोपों का खंडन करते हैं और कथित सेक्स वीडियो को अपने ख़िलाफ़ विरोधियों की साज़िश बताते हैं।

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