फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Super PMO's screws Key ministries.

दिग्गज मंत्रियों पर ‘सुपर PMO’ भारी, आखिर कौन है सुपर PMO?

Tue, 21 Apr 2015 10:49 AM IST
Updated Tue, 21 Apr 2015 10:49 AM IST
विज्ञापन
Super PMO's screws Key ministries.

लोकप्रियता के शिखर पर सवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शासन चलाने का तरीका संभवत: अलग है।

विज्ञापन


पीएमओ के बाद केंद्रीय कैबिनेट में गृह, वित्त, रक्षा और विदेश मंत्रालयों को सबसे ताकतवर माना जाता है, लेकिन मोदी के ‘सुपर पीएमओ’ के जरिए इन मंत्रालयों के कामकाज में पर्दे के पीछे से हस्तक्षेप ने फैसले लेने की गति धीमी कर दी है।

पीएम मोदी के करीबी माने जाने वाले अरुण जेटली का वित्त मंत्रालय गुजरात कैडर के अधिकारियों से भरा हुआ है, जिससे लगता है कि मोदी ने जेटली की घेरेबंदी कर दी है।
विज्ञापन


पिछले आम बजट में पीएमओ की ओर से किए गए भारी बदलावों से यह बात और पुख्ता हो जाती है। कुछ ऐसी ही स्थिति अन्य अहम मंत्रालयों की हैं।

आम बजट में पीएमओ के निर्देश पर हुए थे कई बदलाव

Super PMO's screws Key ministries.

‘सुपर पीएमओ’ के मंत्रालयों पर नियंत्रण करने की कवायद पिछले साल नवंबर में मोदी के भरोसेमंद गुजरात कैडर के अधिकारी हसमुख अधिया की वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव के रूप में नियुक्ति से शुरू हुई।

अधिया भारतीय प्रबंधन संस्थान के गोल्ड मेडलिस्ट हैं और उन्होंने योग में भी पीएचडी की है। मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पसंदीदा 1985 बैच के आईएएस गिरीश चंद्र मूर्मू को वित्त मंत्रालय में व्यय विभाग का संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है।

हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय का निदेशक बनाने की तैयारी चल रही है। यह पद लंबे समय से खाली है। कुछ ही दिन पहले 1987 बैच के वरिष्ठ आईएएस राज कुमार को भी वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों का संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

कुमार की नियुक्ति को जेटली को पूरी तरह से घेरने की कोशिश माना जा रहा है। कुमार आईआईटी ग्रेजुएट हैं और गुजरात में तैनात थे। सच्चाई यह है कि फरवरी में पेश आम बजट के दौरान बजट में पीएमओ की ओर से जिस तरह से हस्तक्षेप किया गया, उससे वित्त मंत्रालय के कई अधिकारी बहुत नाखुश थे।

कई फैसलों में ‘सुपर पीएमओ’ के हस्तक्षेप

Super PMO's screws Key ministries.

मंत्रालय के अधिकारियों की जानकारी के बगैर इसमें कई अहम बदलाव कर दिए गए। इस बारे में एक अधिकारी ने बताया कि पीएमओ ने 40 से 50 फीसदी बजट प्रस्तावों को बदल दिया।

कई अधिकारियों का कहना है कि अन्य मंत्रालयों में पीएमओ का इसी तरह का हस्तक्षेप सामान्य बात है। यही कारण है कि मोदी सरकार के सत्ता संभालने के 10 माह से अधिक होने के बावजूद अभी तक दिल्ली की नौकरशाही उनके कामकाज के तरीकों से सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाई है और मेक इन इंडिया अभियान सहित कई अहम परियोजनाएं अनिश्चय की स्थिति में हैं या फिर उनमें संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है।

कोयला मंत्रालय पर पीएमओ की सीधी नजर
विभिन्न कारणों से सुर्खियों में रहने वाले कोयला मंत्रालय पर भी सुपर पीएमओ की सीधी नजर है। साल 1987 बैच के वरिष्ठ आईएएस और आईआईटी ग्रेजुएट आरपी गुप्ता को नया कोयला सचिव बनाया गया है।

विज्ञापन

तमाम मंत्रालयों में गुजरात कैडर

Super PMO's screws Key ministries.

अरुण शर्मा को गृह मंत्रालय भेजने की थी तैयारी
पिछले दिनों आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार शर्मा को दिल्ली की सत्ता के करीब लाते हुए गृह मंत्रालय में नियुक्त करने की कोशिश की गई, लेकिन माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह के विरोध के बाद उन्हें सीबीआई में संयुक्त निदेशक नियुक्त किया गया। ऐसी चर्चाएं चल रही है कि राजनाथ को भी अपना मंत्रालय चलाने में पूरी छूट नहीं है।

... तो क्या सुषमा और परिकर भी हैं नाखुश
पीएम मोदी अपनी विदेश यात्राओं के दौरान छाए रह रहे हैं, लेकिन देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस पूरी तस्वीर से गायब हैं। यह तय है कि जिस तरह से पीएमओ रिमोट कंट्रोल के जरिए विदेश मंत्रालय को चलाना चाहता है, उससे सुषमा खुश नहीं हैं। इसी तरह का एक ताजा मामला मोदी के फ्रांस से 36 रफाल फाइटर विमानों की खरीद की घोषणा का है। आश्चर्य की बात यह है कि इस घोषणा के दौरान रक्षा मंत्री मनोहर परिकर मौजूद नहीं थे। इस बारे में विस्तृत जानकारी होने से उन्होंने अनभिज्ञता जताई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed