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सुपर बाजार मामला: मालिक, प्रबंध निदेशक को नोटिस
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
Updated Sat, 03 Nov 2012 07:33 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सुपर बाजार से निकाले गए एक हजार से भी ज्यादा कर्मियों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर मालिकों, निवेशकों और प्रबंध निदेशक को नोटिस जारी किया है। कर्मचारियों ने याचिका में शीर्षस्थ अदालत की ओर से पूर्व में दिए गए आदेशों के उल्लंघन का हवाला दिया है।
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जस्टिस केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने गजराज सिंह व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर प्रतिपक्षों से जवाब तलब किया है। कर्मचारियों की ओर से पेश अधिवक्ता रोहित पांडेय ने पीठ को बताया कि बाजार के मालिकों और निवेशकों ने कर्मचारियों के बकाया भत्ते, देनदारों की रकम और सरकार के ऋण का भुगतान नहीं किया है, जबकि शीर्षस्थ अदालत ने मई, 2010 में जारी आदेश में बकाया भत्तों के 54.31 करोड़ रुपये का पूर्ण भुगतान करने को कहा गया था।
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कर्मचारियों के आवास सहित अन्य भत्तों में बड़ी कटौतियां की गईं और गत माह 5 अक्तूबर को 1030 कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के सेवा से मुक्त कर दिया गया। अधिवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 26 फरवरी, 2010 को 504 करोड़ की नीलामी के प्रस्ताव पर सुपर बाजार को फिर से शुरू किए जाने की अनुमति प्रदान की थी।
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अधिवक्ता ने बताया कि राइटर्स एंड पब्लिसर्श लिमिटेड ने बदतर स्थिति वाले सहकारी बाजार को पुनर्जीवित करने का जिम्मा लिया था। इस नीलामी में सुपर बाजार के कर्मियों के बकाया धन का भुगतान और उनकी सेवाओं को जारी रखने की शर्त भी शामिल थी, लेकिन ऐसा किया नहीं गया।
यह कारगुजारी शीर्षस्थ अदालत के उन आदेशों का उल्लंघन है, जिनमें सहकारी बाजार की नीलामी के दौरान कर्मचारियों के हितों को संरक्षित किया गया था। सर्वोच्च अदालत ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए प्रतिपक्षों को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई जनवरी, 2013 में होगी।