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इन जगहों से था सुनंदा का खास नाता
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 18 Jan 2014 12:05 PM IST
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सुनंदा पुष्कर की मौत की सूचना मिलते ही छन्नी हिम्मत सेक्टर पांच मकान नंबर 133 में मीडिया का जमावड़ा लग गया। घर के अंदर चौकीदार हरबंस लाल ही मौजूद था, जो पिछले पांच साल से सुनंदा के पिता रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल पीएन दास के घर रह रहा है।
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हरबंस लाल ने बताया पिछले साल अक्तूबर महीने में सुनंदा छन्नी हिम्मत अपने मायके आई थी। सभी काफी खुश थे। उसे भी मैडम ने काफी प्यार दिया। अपने पिता का हालचाल पूछकर एक दिन ठहरने के बाद अगले दिन ही वह वापस लौट गई। वह उनकी बहन की तरह थी। उसकी मौत की सूचना उसे भी किसी दोस्त ने फोन करके बताई। उन्हें इसका काफी दुख है।
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हरबंस ने बताया सुनंदा की मां के देहांत के बाद से घर में कोई नहीं है। पिता पीएन दास भी अपने बड़े बेटे कर्नल राजेश पुष्कर के पास पटियाला में रहते हैं। दूसरा बेटा उनका दुबई में इंजीनियर है। हरबंस ने बताया कर्नल साहब अपनी बेटी की शादी से काफी खुश थे। कई बार उन्हें कहते हुए सुना कि अच्छी शादी की है।
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क्षेत्र के पूर्व कारपोरेटर परवीन कुमार गुप्ता के अनुसार करीब ढाई साल से इस घर में कोई नहीं है। केवल पिछले साल कुछ दिन के लिए कर्नल साहब आए थे। उसी दौरान सुनंदा भी आई थी। करीब 35 साल पहले कर्नल पीएन दास ने छन्नी हिम्मत में घर बनाया था। उसके बाद अन्य घर बने। कुछ साल पहले ही रिटायर्ड होने के बाद वह जहां रहने लगे थे। पड़ोसी राज कुमार के अनुसार मोहल्ले में पीएन दास का अच्छा रुतबा था। सुनंदा के जम्मू आने की सूचना मिली थी। इसके अलावा उन्हें कोई जानकारी नहीं है। पड़ोसियों ने भी सुनंदा की मौत पर अफसोस जताया।
सुनंदा पुष्कर की मौत से नाहन भी स्तब्ध
शाही महल नाहन में पिछले साल 15 मई को आयोजित मंगल तिलक समारोह में शिरकत करने आईं सुनंदा पुष्कर अपनी छाप छोड़ गई थीं। उनकी मौत की खबर से नाहनवासी भी स्तब्ध हैं। शुक्रवार रात जैसे ही लोगों को सुनंदा पुष्कर की मौत की खबर मिली तो लोग सन्न रह गए।
नाहन के शाही परिवार एवं जयपुर रिसायत की महारानी पदमिनी देवी के दोहते लक्ष्यराज प्रकाश के मंगल तिलक समारोह में अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया के साथ सुनंदा यहां आईं थी।
ग्रेंड-व्यू होटल जमटा के प्रबंधक सुभाष ठाकुर ने कहा कि पिछले साल 15 मई को शाही परिवार के साथ सुनंदा पुष्कर उनके होटल में रात करीब दो से तीन घंटे ठहरी थीं। उनके साथ डिंपल कपाड़िया एवं दिया कुमार भी थे। यहां के सौदर्य को उन्होंने करीब से निहारा। जाते हुए उन्होंने वायदा किया था कि वह जब दोबारा नाहन आएंगी तो अपने पति केंद्रीय मंत्री शशि थरूर को भी साथ लाएंगी।
उन्होंने बताया कि वह मिलनसार और हंसमुख स्वभाव की महिला थीं। उनके अकस्मात मौत की खबर से उन्हें धक्का लगा है। उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं हिमफेड के चेयरमैन कंवर अजय बहादुर ने सुनंदा पुष्कर की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनको नाहन में करीब से देखा था। वह अधिकतर समय शाही परिवार के साथ रही थीं। उन्होंने जयपुर की महारानी पदमिनी देवी के साथ कुछ पल यहां गुजारे थे, जो यादगार हैं।
कश्मीरी पंडित थी सुनंदा पुष्कर
सुनंदा पुष्कर का जन्म सोपोर के पास बोमई इलाके में एक जमींदार कश्मीर पंडित के घर में हुआ। पिता लेफ्टिनेंट कर्नल पीएन दास 1983 में सेना से रिटायर्ड हुए। एक जनवरी 1962 को जन्मी सुनंदा गवर्नमेंट कालेज फार विमेन श्रीनगर से स्नातक थीं। आरंभ में वह दुबई की रियल इस्टेट कंपनी टेकॉम में डायरेक्टर रहीं।
उनकी पहली शादी एक कश्मीरी पंडित संजय रैना से हुई, जिससे उनका बाद में तलाक हो गया। उसके बाद उन्होंने केरल के एक व्यापारी सुजीथ मेनन से विवाह किया। 1997 में मेनन की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। दूसरे पति से उसका 21 वर्षीय बेटा शिव मेनन है।
22 अगस्त 2010 को सुनंदा ने मंत्री शशि थरूर के साथ विवाह रचाया। उनके पिता पीएन दास का जम्मू के छन्नी हिम्मत में मकान है, जबकि वे अपने बेटे के साथ पटियाला में रहते हैं। सुनंदा का एक भाई बैंक में और दूसरा सेना में कार्यरत है। सुनंदा की आईपीएल में खेलने वाली कोच्चि टीम में भी हिस्सेदारी रही।