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गरीब बच्चों को स्कूल भेजना ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 16 Dec 2015 01:17 PM IST
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शिक्षा हर बच्चे का हक है’ दीवारों पर लिखे ऐसे सरकारी नारे गोरखपुर की सीमा त्रिपाठी के दिलों में बसते हैं। गरीब बच्चों को स्कूल भेजना सीमा के लिए किसी प्रार्थना से कम नहीं।
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सरकारी योजनाएं आती थीं, चली जाती थीं। शिक्षा से जुड़े सरकारी वादे दीवारों पर वैसे ही पड़े रह जाते और वैसे ही खाली स्लेट की तरह पड़ी रह जाती थी उन गरीब बच्चों की जिंदगी, जो या तो कूड़ा बीनते थे या फिर मजदूरी करते थे। तभी गोरखपुर की रहने वाली सीमा त्रिपाठी ने सोचा था-` शिक्षा तो हर किसी का अधिकार है।’
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इसी के बाद सीमा ने उन कारणों पर ध्यान देना शुरू किया, जिसकी वजह से गरीब घरों के बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे। एक दिन वह रुस्तमपुर के स्लम एरिया में मजबूत इरादे के साथ पहुंचीं। शहर के इस इलाके में कई ऐसे बच्चे थे, जो स्कूल तो जाना चाहते थे, लेकिन गरीबी आड़े आती थी। वैसे भी स्लम एरिया के उन बच्चों की तरफ बहुत कम लोगों का ध्यान जा पाता है, लेकिन सीमा ने स्लम एरिया के उन बच्चों को शिक्षित करने का जिम्मा उठाया।
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गरीबों की मदद करने की प्रेरणा सीमा को अपने पिता से मिली है। सीमा के पिता गोरखपुर में वकील थे, जो गरीब और असहाय लोगों के केस मुफ्त में लड़कर उनकी मदद किया करते थे।
आज उनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन सीमा अपने पिता के नक्शे-कदम पर चलते हुए समाज सेवा के कार्यों में लगी हुई हैं। पिता के गुजरने के बाद सीमा ने `गणेश बिहारी मेमोरियल संस्था’ की स्थापना की और तभी से गरीब बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा करने का कार्य कर रही हैं।
समाज सेवा के साथ-साथ सीमा एन्वायरमेंटल एक्शन ग्रुप में नौकरी भी कर रही हैं। सबसे खास बात यह कि सीमा गरीब बच्चों को पाठ्य-सामग्री, भोजन, कपड़े जैसी जरूरतों को भी पूरा करती हैं आैर वह भी निशुल्क। सीमा कहती हैं,`किसी गरीब बच्चों को स्कूल भेज कर लगता है, मानो जिंदगी में एक और प्रार्थना शरीक हो गई हो।’