फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   success story of resham fatima

लड़की बहुत कुछ सिखा गई जो नहीं डरी चाकू की नोंक से

Tue, 15 Dec 2015 09:28 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 15 Dec 2015 09:28 PM IST
विज्ञापन
success story of resham fatima

चेहरे पर तेजाब फेंका गया लेकिन हार नहीं मानी। अपनी बहादुरी का लोहा मनवाते हुए उसने तेजाब फेंकने वाले शख्स से लड़ाई लड़ी और बचकर निकल गईं। लेकिन जो तकलीफ तेजाब की छींटों ने दी उसका दंश वो आज तक झेल रही हैं। हम बात कर रहे हैं लखनऊ के सत्यलोक कॉलोनी की रहने वाली रेशम फातिमा।

विज्ञापन


16 साल की रेशम फातिमा ट्यूशन पढ़कर लौट रही थीं। इस दौराना उनके एक रिश्तेदार ने चाकू की नोंक पर उन्हें पकड़कर शहर से दूर हाईवे पर ले गया। रिश्तेदार रेशम से शादी करना चाहत था। रेशम ने जब इसका विरोध किया तो उसने चेहरे पर तेजाब डाल दिया।
विज्ञापन


लेकिन रेशम ने उसका बहादुरी से सामना किया और ऑटो रिक्शा में बैठकर रेशम नजदीकि पुलिस स्टेशन पहुंच गईं। रेशम को उसके रिश्तेदार ने जो दर्द दिया, उसकी भरपाई तो संभव नहीं है लेकिन रेशम ने समाज को बदलने के लिए एक अभियान की नींव जरूर रख दी है। रेशम फातिमा एसिड अटैक के खिलाफ कैंपेन चला रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


रेशम फातिमा कहती हैं कि बच्चियों पर तेजाब से हमले करने वाले लोग समाज और अमन के दुश्मन हैं। ऐसे लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। रेशम एसिड अटैक पीड़िताओं की सहायता करने के साथ-साथ एसिड हमले करने वाले लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं।

रेशम एसिड अटैक पीड़िताओं से मिलती हैं और इस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करती हैं। रेशम फातिमा के इस सराहनीय कार्य के लिए वर्ष 2014 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेशम की वीरता की गाथा की प्रशंसा की थी।


उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाली रेशम फातिमा पहली महिला हैं। इसी वर्ष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार प्रदान किया है। जामिया विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई कर रहीं रेशम फातिमा कहती हैं कि सरकार को महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार को प्रमुखता से लेना चाहिए।

खासकर एसिड अटैक के मामलों में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। रेशम कहती हैं कि समाज की खूबसूरती के दुश्मन दरिंदों को समाज में रहने का कोई हक नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed