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विक्षिप्त महिला की हालत देखकर उठाया समाजसेवा का बीड़ा

Tue, 15 Dec 2015 09:02 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 15 Dec 2015 09:02 PM IST
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 success story of pratibha sharma

वकालत प्रतिभा का पेशा है लेकिल दिल में दिल कुछ और ही करने को कहता है। पेशे से वकील प्रतिभा शर्मा 15 सालों से बच्चों और महिलाओं को सशक्त बनाने का काम कर रही हैं।

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समाजसेवा की यह कहानी शुरू होती है एक दर्द भरी घटना से। वृंदावन के गोपीनाथ बाजार की रहने वाली प्रतिभा शर्मा ने वर्ष 2007 में एक विक्षिप्त महिला को देखा।  महिला ने दो जुड़वां बच्चों को जन्म दिया लेकिन उसकी मदद और इन बच्चों की परवरिश के लिए कोई आगे नहीं आया। तड़पती महिला और रोते बच्चों को देखकर प्रतिभा का दिल पसीज गया। प्रतिभा ने तुरंत महिला को अस्पताल में भर्ती कराया और बच्चों को वात्सल्य ग्राम। इसी के साथ शुरू हुई शोषण के खिलाफ उनकी लड़ाई।
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हिंदी और साइकोलॉजी से एमए एवं एलएलएम कर चुकीं प्रतिभा ने वर्ष 2011 में वृंदावन की विधवाओं पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया। प्रतिभा ने इन विधावाओं के शोषण, अत्याचार और दयनीय हालत की खुद सर्वे रिपोर्ट तैयार की।
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 प्रतिभा की बनाई सर्वे रिपोर्ट पर महिला आयोग को सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद महिला आयोग ने वृंदावन में विधवाओं के लिए आश्रय सदन बनाने का निर्देश दिया। महिलाओं के हक की समस्या हो या बच्चों के, उनकी प्राथमिकता होती है, समस्या का समाधान कराना।

किसी भी वजह से बिखरे परिवारों को दोबारा जोड़ने का काम करती है प्रतिभा। उनकी इस प्रतिभा की बदौलत वह अब तक 200 से अधिक परिवारों को टूटने से बचा चुकी हैं। बच्चों के साथ हो रहे अपराधों के लिए प्रतिभा स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक करती हैं।

इसके लिए उन्होंने 2013 में बाल न्याय मिशन की भी स्थापना की। प्रतिभा जिला जज की अध्यक्षता में गठित की गई परिवार वाद निस्तारण समिति की सदस्य की भूमिका भी बखूबी निभा रही हैं।

बाल कल्याण समिति मथुरा के साथ जुड़कर प्रतिभा ने पांच सालों में कानून लड़ाई लड़कर 500 से अधिक लावारिस बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया है तो कई बच्चों को गोद दिलवा उन्हें मां-बाप का प्यार दिलवाया है।


वृंदावन में ढोंगी साधुओं की कैद से दो बालिकाओं को मुक्त कराकर राजकीय बाल गृह शिशु सदन भिजवाया। इसी के साथ 200 से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराने का काम भी उन्होंने किया है। प्रतिभा स्कूलों और गांव में जाकर लोगों को बाल विवाह के खिलाफ मुहिम से जोड़ती हैं। प्रतिभा एक शपथ पत्र भरवाती हैं, जिसमें बेटियों के बाल विवाह न करने की बात लिखी होती है।

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