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बेटी बचाने को बनाया अपने जीवन का लक्ष्य

Wed, 16 Dec 2015 02:37 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 16 Dec 2015 02:37 PM IST
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success story of madhvi shengar

निःसंतान रहने की शपथ लेकर कानपुर की माधवी सेंगर अब तक सैकड़ों कन्याओं की मां बन चुकी हैं, जो उनके `बेटी बचाओ अभियान’ की बदौलत इस दुनिया में आईं। माधवी शादी में सात फेरे लेने वाले नव युगलों को 'आठवां वचन'  भी दिलाती हैं कि वे कन्या-भ्रूण हत्या नहीं करेंगे, बेटी को जन्म लेने देंगे।

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कहानी 22 साल पहले शुरू हुई है। एक नवजात बच्ची को बस से फेंक देने की खबर ने कानपुर की माधवी सेंगर को झकझोर कर रख दिया था। तब माधवी ने प्रण लिया कि वह निःसंतान रहेंगी और बेटियों को बचाने के लिए कुछ करेंगी। और फिर 2008 से `बेटी बचाओ’ अभियान से जुड़ गईं।
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अपने देह दान की घोषणा कर चुकीं माधवी ने `युग दधीचि देहदान संस्थान’ की नींव रखकर कानपुर के `गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज’ के छात्रों को पढ़ाई के लिए मानव शरीर की उपलब्धता को
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आसान तो बनाया ही, साथ में मेडिकल कॉलेज के सारे छात्रों को शपथ भी दिलाई कि वह न तो कन्या-भ्रूण हत्या करेंगे, न ही लिंग जांच करेंगे। यूपी के सभी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी उनकी संस्था अब तक 145 ह्यूमन बॉडी मेडिकल कॉलेजों को पढ़ाई के लिए दान करा चुकी है।

उनकी संस्था के अथक प्रयास से 2,500 लोगों ने मृत्यु पश्चात अंतिम पारिवारिक संस्कार की बजाय देहदान के लिए पंजीकरण भी कराया है। 2010 से माधवी ने बेटी बचाने के लिए एक अनोखा प्रयास शुरू किया।

वह शादी में सात फेरे लेने वाले नव युगलों को 'आठवां वचन' दिलाती हैं कि वे कन्या-भ्रूण हत्या नहीं करेंगे, बेटी को जन्म लेने देंगे। `बेटी बचाओ अभियान’ को 22 साल दे चुकीं माधवी की संस्था ने अब तक एक हजार नई जोड़ियों को उनकी संस्था `आठवां वचन’ दिला चुकी है।

100 से ज्यादा जागरूकता रैली और गोष्ठी कर वह समाज को संदेश दे चुकी हैं कि बेटी नहीं होगी, तो हम नहीं होंगे। कन्या-भ्रूण हत्या पर सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर माधवी की संस्था इस वर्ष की शुरुआत में दस हजार पत्र लिखकर पीएम को भेज चुकी है।


700 लोगों के निःशुल्क नेत्र प्रत्यारोपण जैसा कार्य भी माधवी की संस्था ने किया है। निःसंतान रहने की शपथ लेकर माधवी अब तक उन हजारों कन्याओं की मां बन चुकी हैं, जो उनके इस जागरूकता अभियान की बदौलत इस दुनिया में आईं।

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