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लगातार हुईं कोशिशें और बदल गई गांव की हवा

Wed, 16 Dec 2015 03:01 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 16 Dec 2015 03:01 PM IST
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success story of anjani

बचपन से दौड़ती रहीं, अब एक विचार बनकर दौड़ रही हैं। राष्ट्रीय स्तर की धाविका अंजनी मल्लाह के प्रयास से उनके गांव को पचास शौचालय मिले हैं। पूरे इलाके की सोच को बदल देने का सफर जारी है।

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काम आसान नहीं था। ऐसे काम आसान भी नहीं होते। लेकिन, राष्ट्रीय स्तर की धाविका रह चुकी अंजनी मल्लाह कहां थकने वाली थीं। हाथ-पांव जोड़े, खुशामद की, बीमारी का डर दिखाया, कहीं खुद भी डराया फिर भी गांव में शौचालय बनवाने को जल्दी राजी नहीं होते थे लोग। शाम को राजी हुए, तो अगली सुबह मुकर गए। पैसों का रोना अलग। वैसे भी गांवों में बहाने की कमी होती है क्या? लेकिन अंजनी मल्लाह ने भी तो जिद ठान ली थी कि अपने गांव रानीपुर  को शौचालय के मामले में आदर्श बनाकर रहूंगी।
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अंजनी का प्रयास ही रहा कि बस्ती जिले के रुधौली विकास क्षेत्र का गांव रानीपुर धीरे-धीरे बदलने लगा, क्योंकि अंजनी की बातों में दम था। अंजनी का सपना सीआरपीएफ में प्रवेश पाना था। उसने दौड़ना शुरु किया। लेकिन लंबाई कम होने के कारण वह चूक गई। इसके बावजूद वह रुकी नहीं। थकी नहीं। दौड़ती रही। वर्ष 2011 में बस्ती के हरैया में मिनी मैराथन का आयोजन हुआ, इसमें 300 लड़कों में अकेली दौड़ने वाली लड़की अंजनी थीं। दौड़ी भी और जीती भी।
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 2014 में पुणे इंटरनेशल गेम्स में भी उन्होंने अपनी काबिलियत को दिखाया। इलाहाबाद में आयोजित नेशनल मैराथन में 42 किलोमीटर की दौड़ में 13वां स्थान पाने वाली अंजनी ने रफ्तार को ही अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया था। लेकिन सुबह अभ्यास के लिए निकलती, तो खुले में शौच करते लोगों को देखकर परेशानी होती। साथ ही महिलाओं को खुले में शौच जाते देख दुख भी होता।  अंजनी ने तभी ठान लिया कि वह गांव में लोगों के लिए शौचालय बनवाकर रहेगी।

 इस मुहिम का झंडा हाथ में लेकर अंजनी ने अपने साथ अन्य महिलाओं को भी जोड़ा। ब्लॉक स्तर पर धरना प्रदर्शन से बात नहीं बनी, तो तहसील पर अपनी मांग रखी। यहां से भी बात न बनी, तो डीएम कार्यालय पर बैठ गईं। आखिर प्रयास सफल हुआ।  उनके गांव में शौचालय बनने लगे। आज उनके गांव में पचास से ज्यादा शौचालय बन चुके हैं और कुछ पर काम चल रहा है। अंजनी के इस कदम से गांव की महिलाओ को अब खुले में शौच के लिए नहीं जाना पड़ता।

अपने इस अभियान को अंजनी ने अपनी ससुराल संत कबीरनगर के मेडरापार गांव में भी चला रखा है। यहां डीएम से लेकर विधायक और सांसद तक का घेराव वह कर चुकी हैं। उन्हें मेडरापार में 26 शौचालय, एक आंगनबाडी, एक स्कूल बनाने का आश्वासन मिल चुका है।


अंजनी इन गांवों को शौचालय दिलाने के बाद शराबबंदी और शिक्षा के लिए स्कूल खुलवाने के अभियान की शुरुआत करना चाहती हैं। अंजनी कहती हैं,`ये लड़ाई हम नहीं लड़ेंगे, तो कौन लड़ेगा। समाज को बदलना है, तो शुरुआत तो करनी ही पड़ेगी।’

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