फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Subrahmanyam denies be a judge of the Supreme Court

सुब्रह्मण्यम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनने से किया इनकार

Thu, 26 Jun 2014 07:45 AM IST
Updated Thu, 26 Jun 2014 07:45 AM IST
विज्ञापन
Subrahmanyam denies be a judge of the Supreme Court

पूर्व सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम ने उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनने से इनकार कर दिया है। उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा को पत्र लिखकर शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की सिफारिश वापस लेने का आग्रह किया है।

विज्ञापन


उन्होंने अपने पत्र लिखने की वजह बताते हुए कहा कि एक जज को शक के दायरे से परे और निष्कलंक होना चाहिए। मुझ पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं लेकिन मैंने पद की गरिमा के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद की उम्मीदवारी छोड़ना सही समझा।
विज्ञापन


सरकार की ओर से कोलेजियम की सिफारिश लौटाने के मसले पर लगे सभी कथित आरोपों को नकारते हुए सुब्रह्मण्यम ने यह स्वीकार किया कि इस घटनाक्रम से उन्हें और उनके परिवार को बहुत तकलीफ हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश पद नियुक्ति का है मामला

Subrahmanyam denies be a judge of the Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद पर अपनी नियुक्ति को लेकर सरकार के नकारात्मक रुख पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहते हुए पूर्व सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार में कुछ साल से ऐसा चलन देखने को मिला है कि उसे हर पद पर ऐसे लोग चाहिए जो मित्रवत हों लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं।

सोहराबुद्दीन मामले में अदालत के सहायक की भूमिका के चलते सरकार का रुख नकारात्मक रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं यह तो नहीं कह सकता कि ऐसा किस वजह से हुआ लेकिन मैंने बिना राग-द्वेष के वकील के रूप में अपने फर्ज को अंजाम दिया है।

यदि मैं किसी को दुश्मन लगता हूं तो क्या किया जा सकता है। याद रहे कि सुब्रह्मण्यम ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर उनकी उम्मीदवारी की सिफारिश वापस लेने का आग्रह किया है।

क्या है विवाद

Subrahmanyam denies be a judge of the Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सर्वोच्च अदालत में जजों की नियुक्ति के लिए सिफारिश सरकार को भेजी थी। सरकार की ओर से गोपाल सुब्रह्मण्यम के नाम पर कोलेजियम से पुनर्विचार करने को कहा गया।

इसके पीछे कुछ नकारात्मक कारण सरकार की ओर गिनाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि कोलेजियम की ओर से दोबारा वरिष्ठ अधिवक्ता के नाम की सिफारिश किए जाने पर सरकार उसे नहीं लौटा सकती है।

गोपाल सुब्रह्रण्यम के मुताबिक न्यायाधीश के पद की एक गरिमा होती है। एक जज को शक, संदेह से परे और निष्कलंक होना चाहिए। मुझ पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं लेकिन मैंने पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इसे नहीं स्वीकार करना ही सही समझा।

जो हुआ बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण और बहुत तकलीफदेह है। यही नहीं मेरे परिवार को भी इस पूरे घटनाक्रम से बड़ी वेदना हुई है। लेकिन जज के पद की महत्ता के अनुरूप मैंने अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने का आग्रह किया है।

अमित शाह का मामला एक अहम वजह

Subrahmanyam denies be a judge of the Supreme Court

गोपाल सुब्रह्मण्यम सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले में एमिकस क्यूरी थे और उनकी सिफारिश पर ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे।

इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खासमखास अमित शाह को आरोपी बनाया गया था और उनके गुजरात प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी। सुब्रह्मण्यम के नाम पर सरकार की आपत्ति को यह एक अहम वजह माना जा रहा है।

पत्र में क्या लिखा
गोपाल सुब्रह्मण्यम ने 9 पृष्ठों में लिखे अपने पत्र में कहा है कि हाल के दिनों में जान बूझकर उनके खिलाफ खबरें प्लांट की जा रही हैं। आईबी और सीबीआई की कथित नकारात्मक रिपोर्टें लीक की जा रही हैं।

उनकी विश्वसनीयता और सच्चाई पर प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं। गत 15 मई को आईबी की रिपोर्ट उनके पक्ष में थी, लेकिन कानून मंत्रालय ने जानबूझकर सीबीआई को इस मामले में जांच का जिम्मा थमाया, जिसका मुख्य उद्देश्य उनके खिलाफ कुछ खामियां निकालना था।

मोदी सरकार पर भी साधा निशाना

Subrahmanyam denies be a judge of the Supreme Court

उन्होंने परोक्ष रूप से मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है कि पिछले कुछ सप्ताह के घटनाक्रमों पर नजर डालने से मेरे मन में इस बात का संशय उठता है कि मौजूदा कार्यपालिका में न्यायपालिका की अखंडता, स्वतंत्रता और न्यायिक क्षमता का सम्मान करने की क्षमता नहीं है। मुझे ऐसी उम्मीद नहीं कि आने वाले समय में इस प्रकार के रवैये में कोई सुधार भी आएगा।

क्या है कोलेजियम सिस्टम
सुप्रीम कोर्ट ने 1993 में 9 जजों की बेंच ने आदेश पारित कर कोलेजियम सिस्टम की शुरुआत की थी। इसी के तहत हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए नाम भेजा जाता है।

हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए एक चीफ जस्टिस और दो सीनियर जजों को मिलाकर बना हाईकोर्ट कोलेजियम नाम भेजता है। इन नामों पर सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम विचार करता है।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और 4 सीनियर जस्टिस होते हैं। नामों पर विचार के बाद उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए नाम खुद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम तय करता है और उसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed