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इस बार विपक्ष में भी नहीं बैठ पाएगी कांग्रेस?

Fri, 16 May 2014 11:53 PM IST
Updated Fri, 16 May 2014 11:53 PM IST
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subhash kashyap express his views on election results

लोकसभा चुनाव के परिणामों के रुझान को देखते हुए स्पष्ट लग रहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। जिस तरह रुझान दिख रहे हैं उसमें भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए तीन सौ से ज्यादा सीट प्राप्त करती हुई दिख रही है।

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जबकि यूपीए के लिए सौ का आकड़ा पार करना भी मुश्किल हो रहा है। ताजा रुझानों से यही साबित हो रहा है कि कांग्रेस साठ सीटों के आसपास रहने वाली है।

ऐसी स्थिति में संविधान विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर कांग्रेस लोकसभा में कुछ सीटों में दस प्रतिशत सीटों से कम लाती है तो वह विपक्ष के नेता पद को भी गंवा देगी।

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क्या कहते हैं संविधान विशेषज्ञ?

subhash kashyap express his views on election results

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्चप का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष का नेता बनने के लिए प्रमुख विपक्षी पार्टी को दस फीसदी सीट लाना जरूरी है।

अगर विपक्षी पार्टी 10 फीसदी सीट नहीं ला पाती है तो फिर लोकसभा में हर विपक्षी पार्टी को अपने नेता का चयन करती है। लेकिन इन्हें विपक्षी नेता का अधिकार और सुविधाएं नहीं मिलती हैं।

लोकसभा में विपक्षी नेता के पद की बड़ी अहमियत है। विपक्षी नेता को केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है। और यह माना जाता है कि वह रैंक के आधार पर प्रधानमंत्री के बाद दूसरे नंबर पर रहता है।

कांग्रेस से नहीं होगा विपक्ष का नेता?

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विपक्षी नेता संसद को अपनी गतिविधियों से काफी हद तक प्रभावित करता है। इस बार कांग्रेस ने चुनाव के परिणामों का आंकलन कर लिया था। इस आधार पर कांग्रेस की नीति यह थी कि विपक्ष में आने पर राहुल गांधी विपक्ष के नेता होंगे।

इस नाते वह हताशा में डूबी कांग्रेस को सक्रिय कर सकेंगे और साथ ही मुद्दों को उठाकर कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए आधार तैयार करेंगे। लेकिन अब जिस तरह परिणाम आ रहे हैं उससे यह लगने लगा है कि कहीं कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए इस आधार को खो न दे।

अगर दस प्रतिशत सीट से कम आती हैं तो फिर संसद में तृणमूल कांग्रेस, और एआई डीएमके जैसी पार्टियों के नेता राहुल गांधी से कहीं ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं। इसके साथ राहुल गांधी का सदन के अंदर उस तरह का रुतबा नहीं रह पाएगा। अब कांग्रेस की पहली कोशिश किसी भी तरह दस फीसदी सीट लाने की होगी।

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सदन में कोई संवैधानिक समस्या नहीं

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लोकसभा चुनाव में अगर कोई भी विपक्षी दल सदन में विपक्ष नेता के लायक सीट नहीं लाता है, तो इससे किसी भी तरह की संवैधानिक दिक्कत नहीं आती है।

‌किसी भी तरह की अड़चन नहीं आती है। सभी दलों के नेता अपने अपने ढंग से मुद्दों को उठाते हैं। यह हो सकता है कि वह स्वाभाविक रूप से मिलकर किसी नेता को दायित्व सौंप सकता है। लेकिन उसको संवैधानिक अधिकार नहीं मिलेगा।

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