तीन बार मौखिक तलाक से खफा हैं मुस्लिम महिलाएं, चाहती हैं निजात
क्या मौखिक रूप से तीन बार तलाक लेने पर बैन लगाया जा सकता है? देश की ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं ऐसा ही सोचती हैं।
एक सर्वे में हुए खुलासे में जो बात सामने आई है उसमें देश की 92.1 फीसदी मुस्लिम महिलाओं का मानना है कि तीन बार तलाक बोलकर शादी का रिश्ता खत्म नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसको बंद करने की मांग की है।
सोशल मीडिया के जरिए ऐसे मामले लगातार बढ़ने के बाद मुस्लिम महिलाएं इसका विरोध करने लगी हैं। स्काइप, मैसेज, ईमेल और वाट्सऐप के जरिए लगातार तलाक लिए जा रहे हैं। इसकी वजह से मुस्लिम समुदाय खासा चिंतित है।
BMMA के सर्वे में हुआ खुलासा
ये सर्वे भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) ने देश के 10 राज्यों में कराया। उनके मुताबिक मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधारों के लिए उन्होंने ये सर्वे कराया।
इस सर्वे में जुलाई और दिसंबर 2013 में देश की 4,710 महिलाओं से बातचीत की गई। इसमें जो तथ्य सामने आए उसके मुताबिक देश की 91.7 फीसदी महिलाओं ने अपने पति की दूसरी शादी का विरोध किया है।
सर्वे में जो तथ्य सामने आए हैं उसके मुताबिक देश की ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं आर्थिक और सामाजिक तौर पर काफी पिछड़ी हुई हैं। इनमें भी लगभग आधी से अधिक महिलाओं का निकाह 18 साल से पहले ही कर दिया गया। जिसके चलते उन्हें घरेलू हिंसा के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा।
सरकार के सामने मामला ले जाने की तैयारी
सर्वे में शामिल करीब 73 फीसदी महिलाओं के परिवार की सालाना आय 50 हजार रुपये से कम थी। वहीं करीब 55 फीसदी महिलाओं का निकाह 18 साल की उम्र से पहले हो गया था।
सर्वे में शामिल 82 फीसदी महिलाओं के पास अपनी जमीन-जायदाद नहीं है जबकि 78 फीसदी महिलाएं आय के अभाव में घरों में काम करती हैं।
इस सर्वे में मुस्लिम समाज की महिलाओं की हालत पर और भी सच उजागर हुए हैं। जिसके बाद BMMA अब इस मुद्दे को सरकार, विधि आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के सामने ले जाने की सोच रही है। जिससे इन महिलाओं को न्याय मिल सके।