'किसी को तीन बार गोली मारी गई थी, तो किसी को चार बार'
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मुझे घर ले चलो। मुझे घर चलो। वे फिर आएंगे और मुझे मार डालेंगे। पेशावर के आर्मी स्कूल से बच कर आया जलाल अहमद चीख रहा था। खौफ का मंजर उसके जहन में जज्ब हो गया था। उसके पिता मुस्ताक अहमद ने बताया कि वह लगातार चीख रहा है, रो रहा है। उसका गला रुंध गया है। खौफ के कारण वह बोल भी नहीं पा रहा है।
मंगलवार को पेशावर के आर्मी स्कूल में पाकिस्तानी तालिबानी आतंकियों आतंकियों ने हैवानियत की हदें पार करते हुए 132 बच्चों समेत 141 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। सात आतंकी पैरामिलिट्री फोर्स की वर्दी पहन कर स्कूल के पीछे की दीवार को फांदकर अंदर घुसे थे।
हमले से बचकर आए बच्चों ने जो बयां किया, वह दिल दहला देने वाला था। एक छात्र ने बताया, 'जब मैं स्कूल से बचकर निकला, बाहर अभिभावकों की भीड़ थी। वे रो रहे थे। मैंने अपने पिता को देखा। वह भी रो रहे थे।'
'हर ओर हमारे दोस्तों की लाशें बिखरी पड़ी थी'
हमले से बचकर आए एक छात्र अब्दुल्ला जमाल ने बताया कि स्कूल में आठवीं, नवीं और दसवीं के छात्रों को फर्स्ट ऐड के बारे में बताया जा रहा था। किसी को नहीं पता चल पाया कि क्या हो रहा है। अब्दुल्ला ने बताया, 'मैंने देखा, बच्चे चीख रहे हैं और एक दूसरे पर गिर रहे हैं। मैं भी गिर पड़ा। मुझे बाद में पता चला कि मेरे पैर में गोली लगी है।
आर्मी स्कूल के छात्र इरफान शाह ने बताया कि हमारे सहपाठी को हम सबके सामने गोली मार दी गई। मैंने महसूस किया की गोली मेरे सिर के बगल से निकली। फायरिंग होते ही शिक्षक ने हमें किसी तरह क्लास से बाहर निकलने को कहा और हम स्कूल के पिछले गेट की तरफ भागे। वहां हम अपनी स्कूल वैन में जाकर बैठ गए, लेकिन हमारे साथियों की जान चली गई। वैन के ड्राइवर ने बताया कि हमारे साथी जन्नत चले गए।
आतंकी हमले से बचकर बाहर निकले एक छात्र ने अंदर के खौफनाक मंजर को बयां करते हुए कहा, ‘जब हम क्लास से बाहर निकलकर आ रहे थे, तो हमने देखा कि गलियारे में हर ओर हमारे दोस्तों की लाशें बिखरी पड़ी थी। उनका खून बह रहा था। किसी को तीन बार गोली मारी गई थी, तो किसी को चार बार।’