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मृत्युभोज को लेकर पंचायत का ऐतिहासिक फैसला

Mon, 25 Jan 2016 09:01 AM IST
Updated Mon, 25 Jan 2016 09:01 AM IST
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strange decision to end a ritual

अलीगढ़ में जिला मुख्यालय से मात्र 17 किमी दूर एक गांव में हुई पंचायत में एक अनूठा निर्णय लिया गया। यहां मृत्युभोज की परंपरा को ‘मृत्यु दंड’ दिया गया। कई गांवों के प्रतिनिधियों और प्रधानों की पंचायत ने लंबी बहस के बाद मृत्यु भोज का आयोजन समाप्त करने का फैसला सुनाया। इस फैसले ने न केवल एक कुप्रथा के खात्मे की नींव रखी गई, बल्कि पंचायत के प्रति भी लोगों का नजरिया बदला है।

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विकास खंड धनीपुर क्षेत्र में कुरीतियों के खिलाफ एक सामाजिक आंदोलन खड़ा हो रहा है। आंदोलन की अगुवाई भी गांव की ही जनता कर रही है। रविवार को गांव बरकातपुर में क्षत्रिय महासभा के  योगेंद्र पाल सिंह के नेतृत्व में एक पंचायत बुलाई गई। इसमें सबसे पहले तो ठा. विजय पाल सिंह के निधन पर शोक प्रकट किया गया।
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इसके बाद बरकातपुर के प्रधान सतेन्द्रपाल सिंह, चांदगढ़ी के प्रधान पप्पू, गुरुसिकरन के प्रधान पति राजू चौहान, पूर्व ब्लाक प्रमुख योगेन्द्र पाल सिंह लालू, अलहदादपुर के प्रधान पति अर्जुन सिंह भोलू , सतीश कुमार , सिकन्दरपुर के प्रधान सुशील कुमार आदि ने पंचायत में मृत्युभोज की कुप्रथा को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया।

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प्रथा को खत्म करने पर बनी सहमति

strange decision to end a ritual

पंचायत में उपस्थित तीन दर्जन से अधिक गांवों के प्रतिनिधि और प्रभावशाली लोगों ने इस प्रस्ताव पर अपनी अपनी बात रखी। जोरदार बहस के बाद मृत्युभोज की प्रथा को खत्म कर देने पर सहमति बन गई।

पंचायत ने फैसला सुनाया कि अब मृत्युभोज का न तो आयोजन होगा और नहीं ऐसे आयोजन में कोई शामिल होना। क्षेत्र में इसका सख्ती से पालन किया जाएगा। पंचायत में मौजूद लोगों ने मृ़त्युभोज न खाएंगे और नहीं खिलाएंगी की शपथ भी ली। इसके बाद हवन यज्ञ किया गया।

हम मंगल पर पहुंच रहे हैं लेकिन अमंगलकारी परंपराओं से अभी जकड़े हुए हैं। ऐसी परंपराओं को खत्म करना होगा जो विकास में बाधा हैं।
-पप्पू प्रधान, चांदगढ़ी

पंचायत में बरकातपुर के रनपाल सिंह, प्रमोद कुमार, बीरेश पाल सिंह, सिकंदरपुर, रवि बाबू, नंद किशोर श्यामपुर, डा. जुगेन्द्र पाल सिंह, ज्वालागढ़, विकास सिंह खान आलमपुर, नागेन्द्र प्रताप सिंह दाउदपुर, अजीत प्रताप सिंह बालगढ़ी, अमर पाल सिंह आदि।

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