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हिंदुस्तान में बसती है पाकिस्तान के रजा की जान

Mon, 26 Oct 2015 05:04 AM IST
आनंद देव/अमर उजाला, जौनपुर।
आनंद देव/अमर उजाला, जौनपुर। Updated Mon, 26 Oct 2015 05:04 AM IST
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story of mohabbe raza who live in pakistan

‘बहक जाने दो मुझे मेरे मुल्क की मोहब्बत में, ये वो नशा है जो सर से मेरे उतरता नहीं।’ पाकिस्तान के कराची की शाह फैसल कालोनी निवासी 80 वर्षीय मोहब्बे रजा इन लफ्जों में हिंदुस्तान की मिट्टी और यहां की आबोहवा से अपना लगाव बयां करते हैं।

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बंटवारे के वक्त पाकिस्तान चले गए मोहब्बे रजा कहते हैं कि पाकिस्तान मुस्लिम मुल्क जरूर है पर वहां मुस्लिमों को वैसी आजादी नहीं है जैसी भारतीय मुसलमानों को है। मोहब्बे रजा इन दिनों अपनी जन्मभूमि जिले के बक्शा ब्लाक के उत्तरपट्टी रन्नों गांव आए हैं। उनके साथ उनकी पत्नी हुस्न खातून भी हैं।
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रविवार को अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने देश के बंटवारे से लेकर मौजूदा हालात पर अपने तमाम अनुभव साझा किए। बेहद साधारण वेशभूषा में रहने वाले मोहब्बे ने बताया कि मेरा शरीर पाकिस्तान में रहता है पर आत्मा तो हिंदुस्तान में ही बसती है।
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मुस्लिमों को जो आजादी यहां है वह पाकिस्तान में नहीं। वहां परिवार में किसी सदस्य की मौत के बाद कब्र के लिए भी 10 हजार रुपये जमा करने होते हैं। वह कहते हैं कि दिन तो गुजर जाता है पर रात में जब बिस्तर पर पड़ता हूं तो यहां की याद आने लगती है। मेरी दिली ख्वाहिश है कि मौत के बाद मुझे हिंदुस्तान की मिट्टी में दफनाया जाए।

वह कहते हैं कि एक महीने का वीजा मिला है, सरकार कुछ समय और बढ़ा देती तो और कुछ दिन यहां रह लेता। वह उत्तरपट्टी रन्नों गांव में स्थित अपने पिता असगर हुसैन की कब्रिस्तान पर भी गए और वहां सूरे फातेहा पढ़ा। बताते चलें कि रन्नों गांव से लेकर दक्षिणपट्टी बबरखा और जौनपुर शहर में भी उनके तमाम रिश्तेदार और सगे संबंधी रहते हैं।

रियल इस्टेट के काम से जुड़ा है मोहब्बे का परिवार
बंटवारे के वक्त पाकिस्तान चले गए मोहब्बे रजा बताते हैं कि वहां जाने पर हम सबने काफी दुश्वारियां झेलीं। पहले वहां परचून की दूकान की। फिर कुछ साथियों के साथ जमीन की खरीद-बिक्री का काम शुरू किया।


कुछ पूंजी इकट्ठा हो गई तो रियल इस्टेट के काम में उतर गए और भारत से गए शरणार्थियों के लिए एक कमरे का मकान बनाना शुरू किया। इससे पूंजी के साथ प्रतिष्ठा भी मिली। आज उनका परिवार कराची के पाश इलाके 775 सी, रोशन आबाद, शाह फैजल कालोनी-पांच में रहता है। उनके पांच बेटे हैं। एक जेद्दा में बिजनेसमैन है, बाकी चार परिवार का बिजनेस संभालते हैं।

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