ताजमहल के आस पास घटिया निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दी चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को ताजमहल के आस पास घटिया निर्माण तरीके से हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर चेतावनी दी है। कोर्ट का कहना है कि इन खराब निर्माणों की वजह से सफेद संगमरमर से बने खुबसुरत और ऐतिहासिक ताजमहल की सुदंरता नष्ट हो रही है।
जस्टिस टीएस ठाकुर और सी नागप्पन की पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मुगल स्थापत्य कला की जीती जागती मिसाल की सुदंरता को लेकर गंभीर नहीं है। इन निर्माणों से ताजमहल की सुदंरता को नुकसान पहुंच रहा है। कोर्ट ने यह टिप्पणी ताजमहल के पीछे हो रहे सड़क निर्माण के मद्देनजर की है। कोर्ट ने कहा कि आखिर सरकार खुबसुरत इमारत के सुदंरता को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम क्यों नहीं उठा रही?
पीठ ने कहा, 'अगर यह निर्माण कार्य खत्म हो गया है तो आपके इंजिनियरों को शर्म आनी चाहिए। किसी ने भी निर्माण की गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया। इसके निर्माण के लिए बिल कैसे पास हो गया? इसकी ठीक तरह से जांच होनी चाहिए।' इसके बाद सरकार ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए हर जरूरी मानदंडो के इस्तेमाल की बात कही है।
सरकार ने रखा अपना पक्ष
कोर्ट के इस सख्ती पर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए भरोसा दिलाया की वह ताजमहल की सुदंरता को ध्यान में रखकर ही निर्माण कार्य कराएगी। सरकार ने कहा की 500 मीटर लंबे इस सड़क के निर्माण के दौरान ताजमहल की सुंदरता का पूरा ख्याल रखा जाएगा। इसके लिए सड़क निर्माण में तारकोल की जगह लाल चूना पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा।
पीठ ने कहा, 'हमें इस बात की चिंता है कि काम में बारिकियों की कमी है। दुनियाभर से लोग ताज की सुंदरता को देखने के लिए आते हैं और उसके आस पास का निर्माण भी वैसा ही होना चाहिए जैसा ताज है। आपने यह गड़बड़ी की है जो अस्वीकार्य है।' कोर्ट ने यह भी कहा कि छेनी और हथौड़ी की मदद से लोगों ने इस खुबसुरत ताजमहल का निर्माण कर दिया और आज सभी आधुनिक संसाधन और जानकारी मौजूद होने के बावजूद भी सरकार मध्यकालीन सुंदरता से तालमेल नहीं बैठा पा रही।
एडवोकेट एमसी मेहता की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट पिछले 31 सालों में ताजमहल के आस पास हुए निर्माणों की निगरानी कर रहा है। इस दरमियान कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) से भी इस निर्माण के मानकों के बारे में पूछा। जवाब में एएसआई ने बताया, 'हम ताजमहल के आस पास निर्माण कार्यों के प्रस्ताव से खुश हैं लेकिन उसके लिए इस्तेमाल किया जा रहा ग्रेनाइट उच्च स्तर का नहीं है। वह ज्यादा समय तक नहीं टिकेगा। हमें टुकड़ो में योजना नहीं बनानी चाहिए। हमें ऐसी योजना बनानी चाहिए जिससे अगले 50 सालों तक ऐसे निर्माण की जरूरत ही न पड़े।'