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10 साल में दंगों ने ली ढाई हजार जानें
एजेंसी/दिल्ली
Updated Sun, 22 Sep 2013 06:33 PM IST
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हालिया सांप्रदायिक घटनाओं से सहमा भारत पिछले दस साल में एक या दो बार नहीं बल्कि हजारों बार दंगों का दंश झेल चुका है।
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देश के विभिन्न राज्यों में 2002 से लेकर अब तक 8 हजार से ज्यादा दंगे हो चुके हैं, जिनमें ढाई हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
गृह मंत्रालय के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि हमने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा और देश में सांप्रदायिक माहौल लगातार खराब होता चला गया।
बीते एक दशक में भारत में कुल 8,473 सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुईं, जिनमें 2,502 लोगों की मौत हो गई और 28,668 लोग घायल हो गए।
बात अगर 2013 की ही करें, तो 15 सितंबर तक मुजफ्फरनगर समेत देश 479 सांप्रदायिक दंगे झेल चुका है, जिसमें 107 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 1697 लोग घायल हो चुके हैं।
बीते एक दशक में देश की सांप्रदायिक सद्भाव वाली छवि पर सबसे गहरा आघात 2002 में हुआ।
गोधरा ट्रेन हादसे के बाद गुजरात में भड़की हिंसा समेत भारत में उस साल 722 दंगे हुए, जिनमें सर्वाधिक 1130 लोगों को जान गंवानी पड़ी। यही नहीं 4,375 लोग घायल हो गए।
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पिछले साल 668 सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में 94 लोगों की मौत हुई जबकि 3,117 घायल हुए। इसके अलावा आतंकी हमलों में भी 245 लोग मारे गए।
साल 2011 में कुल 580 दंगे हुए, जिनमें 91 लोग मारे गए और 1,899 लोग घायल हो गए। इस साल भी आतंकी हमलों ने देश में तबाही मचाई और 419 लोगों की जान चली गई।
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वर्ष 2010 में तो स्थिति और खराब हुई। कुल 701 दंगों की कीमत 116 लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी जबकि 2138 लोग घायल हो गए। 537 लोगों की जान आतंकी हमलों ने ले ली।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस पर चिंता जता ही चुके हैं। सरकार भी इस समस्या को गंभीरता से ले रही है।
इसी वजह से सोमवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक बुलाई गई है। बैठक में सांप्रदायिक दंगों को रोकने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
शुक्रवार को राष्ट्रपति ने सांप्रदायिक हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा था कि हम इतिहास से सबक नहीं सीख रहे हैं और एक ही गलती को बार-बार दोहरा रहे हैं।
2002 रहा सबसे काला वर्ष
गुजरात समेत इस साल देश में 722 दंगे हुए, जिसमें 1130 लोगों की मौत हुई। जबकि 4373 लोग घायल हुए।