एक MP के कारण पार्टी से निकाले गए मंत्री जी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव में नगीना के सांसद यशवीर धोबी की मुखालफत राज्यमंत्री मनोज पारस को महंगी पड़ गई। हाईकमान से शिकायत होने के बाद मंत्री के खिलाफ यह कार्रवाई हुई है।
सांसद व राज्यमंत्री में शुरू से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा। अफसरों के तबादले के बाद दोनों की लड़ाई सड़कों पर आ गई थी। मनोज पारस एक महिला से गैंगरेप के मामले में फंसे हुए हैं। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
सपा सरकार की ओर से पारस पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने की कवायद भी चल रही थी। डीएम-एसपी से भी इस मुकदमे की रिपोर्ट मांगी गई थी। गैंगरेप के मामले को तो वे जैसे तैसे झेल रहे थे, लेकिन उन्हें नहीं मालूम था कि लोकसभा चुनाव उन पर भारी पड़ जाएगा।
खुलकर अवैध खनन करा रहे हैं मंत्री जी
मंत्री के विरोधी खेमे ने हाईकमान को पहले ही बता दिया था कि मनोज पारस जिले में खुलकर अवैध खनन करा रहे हैं। इसके अलावा कई गैर कानूनी कार्य में भी वे लिप्त हैं। इससे पार्टी की छवि खराब हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक विरोधियों ने मुख्यमंत्री को मंत्री के खिलाफ सबूत भी दिए थे। चुनाव की वजह से हाईकमान ने मंत्री के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया था। मनोज पारस व सांसद यशवीर धोबी में शुरू से ही रिश्ते अच्छे नहीं है। विधान सभा चुनाव के दौरान भी दोनों की नाराजगी जगजाहिर थी।
जिले में सपा सरकार बनने के बाद खुलकर अवैध खनन हो रहा था। इसमें अफसरों की भी मिलीभगत बताई जा रही थी। लोकसभा चुनाव की आहट होते ही सांसद यशवीर धोबी लंबे समय से जिले में तैनात अफसरों को हटवाने में जुट गए।
पार्टी फूट से परेशान था हाईकमान
डीएम-एसपी का तबादला कराने के बाद मनोज पारस के चहेते एसपी देहात प्रबल प्रताप सिंह को भी सांसद ने जिले से हटवा दिया था। पारस ने एसपी का तबादला रुकवाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुए।
तबादलों के बाद तल्खियां और भी बढ़ गई थीं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सपा हाईकमान को नगीना लोकसभा सीट पर इस बार भी जीत मिलने की उम्मीद है। लोकसभा प्रभारी समेत जिले के पार्टी पदाधिकारियों ने भी मनोज पारस के खिलाफ हाईकमान को रिपोर्ट भेज रखी थी।
मनोज पारस के खिलाफ इस रिपोर्ट के आधार पर ही सपा ने एक्शन लिया है। मनोज पारस को बर्खास्त करने से मंत्री के समर्थकों को करारा झटका लगा है।
गैंगरेप के आरोप हैं राज्यमंत्री
इस मामले में रिपोर्ट अदालत के माध्यम से नगीना थाने में 13 जून 2007 को दर्ज हुई थी। मनोज पारस और उनके साथियों ने हाईकोर्ट 16 जुलाई 2007 को से चार्जशीट दाखिल होने तक अपनी गिरफ्तारी पर स्टे प्राप्त कर लिया था।
पुलिस ने दो नवंबर 2007 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बावजूद राज्यमंत्री और उनके साथी अदालत में पेश नहीं हुए। 16 जनवरी 2012 को प्रथम एसीजेएम दिनेश सिंह ने राज्यमंत्री और उनके साथियों को फरार घोषित कर उनके गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।