ये है एसएससी परीक्षा की असली सच्चाई!
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कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की हर परीक्षा में साल्व कॉपी परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थी के पास से मिल रही है। इन अभ्यर्थियों के जरिए पुलिस नकल कराने वाले लोगों तक पहुंच रही है।
इसके बाद भी आयोग के अध्यक्ष एवं निदेशक मान नहीं रहे कि पर्चा आउट हुआ है। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की छपाई एवं उनके केन्द्र तक पहुंचने की प्रक्रिया गोपनीय होने के बाद भी हर परीक्षा के प्रश्नपत्र आखिरकार नकलचियों के पास तक कैसे पहुंच रहे हैं।
एसएससी की सभी परीक्षाओं में हरियाणा एवं दिल्ली के आसपास कोचिंग का संचालन करने वाले अपने सूत्रों के जरिए पर्चा आउट करके अपने यहां पढ़ रहे छात्रों को परीक्षा पास करवाने की जुगत करते हैं।
बरेली, मेरठ, देहरादून, हल्द्वानी, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के कई जिलों में नकल के आरोप में पकड़े गए सभी अभ्यर्थी हरियाणा, दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश में मेरठ, बागपत के पाए गए हैं। इन अभ्यर्थियों के पास पहले से हल प्रश्नपत्र मौजूद रहता है। जब परीक्षार्थी नकल के आरोप में आयोग के अध्यक्ष एवं निदेशक को ज्ञापन देते हैं तो उनका एक ही जवाब होता है कि प्रश्नपत्र आउट नहीं हुआ है।
नकल पर नहीं लग रही लगाम
सीजीएल 2013 की परीक्षा में दिल्ली की कुछ कोचिंग में तैयारी करने वाले 40 फीसदी छात्रों के सफल होने और उनके अंक दूसरे परीक्षार्थियों की अपेक्षा अधिक पाए जाने के बाद भी एसएससी चेयरमैन का जवाब होता है कि इस क्षेत्र के परीक्षार्थियों ने अच्छे तरीके से पर्चा हल किया था, इस कारण से अधिक अंक मिले। आयोग के इस रवैये के कारण परीक्षार्थियों में असंतोष है।
दिल्ली-हरियाणा के परीक्षार्थी पूरे देश में फैलकर अपने नेटवर्क के जरिए परीक्षा पास करने की जुगत में लगे हैं। परीक्षार्थी नकल माफिया के जरिए परीक्षा केन्द्रों पर नकल की व्यवस्था पक्की मानकर अपने शहर में नहीं बल्कि दूर दराज के शहरों में परीक्षा केन्द्र मांगकर परीक्षा देने जाते हैं।
हरियाणा एवं दिल्ली के छात्र छतरपुर, रीवा, छत्तीसगढ़ जाकर परीक्षा देने को वरीयता देते हैं जबकि उनके जिले में परीक्षा केन्द्र हैं। मध्य क्षेत्र के परीक्षा केन्द्रों पर पकड़े गए सभी परीक्षार्थी स्थानीय नहीं बल्कि बाहरी दूसरे प्रदेश के हैं। इन परीक्षार्थियों को चिह्नित करने के लिए आयोग ओर से अलग से व्यवस्था होने के बाद भी नकल नहीं थम रही है।