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चिंदबरम ने खारिज कर दिया था नक्सलियों से वार्ता का प्रस्ताव: श्री श्री रविशंकर

Wed, 30 Sep 2015 02:33 PM IST
Updated Wed, 30 Sep 2015 02:33 PM IST
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sri sri ravi shankar interview on naxal issue

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने दावा किया है कि नक्सली हथियार डालकर शांति व्यवस्था कायम करने के लिए बातचीत के लिए तैयार थे लेकिन तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनका दावा है कि नक्सलियों ने कई बार उनसे बात की थी और सरकार से बात करने की इच्छा जताई थी। उनका कहना है कि अगर सरकार नरमी दिखाती तो शांति के लिए नक्सली इलाकों में उनकी संस्था में किया जा रहा काम आगे बढ़ सकता था।

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उनका आरोप है कि चिदंबरम ने शांति वार्ता के लिए उनके प्रस्ताव को ठुकराते हुए कह दिया था, "आपको इसमें दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। यहां एक सरकार है, यह उसी का काम है। आप कौन होते हैं बीच में इस काम को करने वाले। नक्सलियों से कहिए कि सीधे सरकार से बात करें।"
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श्री श्री रविशंकर ने हाल ही में 1964 से कोलंबिया सरकार के खिलाफ हथियार उठाने वाले विरोधियों को एक तरफा शांति समझौता के लिए तैयार किया और कंबोडिया में शांति व्यवस्था कायम करने में बड़ी सफलता हासिल की। इसके बाद अमर उजाला डॉट कॉम से हुई एक बातचीत में श्री श्री रविशंकर ने पहली बार ये आरोप लगाया था कि चिदंबरम ने नक्सलियों के साथ शांति वार्ता के लिए मध्यस्थता के लिए उनकी ओर से दिए गए प्रस्ताव को नकार दिया था।

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श्री श्री बोले, नक्सलियों से बातचीत के लिए चिदंबरम से मांगी ‌थी मदद

sri sri ravi shankar interview on naxal issue

पी चिदंबरम को नवंबर, 2008 में मुंबई हमलों के बाद शिवराज पाटिल के स्थान पर गृहमंत्री बनाया गया था। अमर उजाला ने नक्सलियों के मुद्दे पर उनसे विस्तार से बातचीत की। पेश है उनसे हुई बातचीत-

सवाल - आपने चिदंबरम से किस प्रकार की मदद मांगी थी और उनका इस मामले में क्या जवाब था?

श्री श्री रविशंकर - मैंने कई बार नक्सलियों को हिंसा का मार्ग को छोड़ने के लिए कहा है। शांति का यह संदेश उन्होंने सुना भी है। जब उन्हें लगा कि उनको समझने वाले लोग हैं तो वह संवाद के लिए आगे आए, कई बार बसों में भर-भरकर आए और आधा पौन घण्टे बात करते थे। वह कहते थे कि हम यदि सरेंडर करेंगे तो हमें जेल में डाल दिया जाएगा और हमारे ऊपर 20-30 केस लाद दिए जाएंगे। कई एरिया कमांडर से मेरी मुलाकात हुई। तब मैंने तत्कालीन गृहमंत्री पी.चिदम्बरम से बातचीत की और कहा नक्सली लोग बातचीत करना चाहते हैं और सुलह चाहते हैं। तब उन्होंने हमें साफ मना कर दिया कि आपको इसमें दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। यहां एक सरकार है, यह उसी का काम है। आप कौन होते हैं बीच में इस काम को करने वाले। नक्सलियों से कहिए कि सीधे सरकार से बात करें। अब यदि सीधे सरकार से ही बात करने का विश्वास उनके पास होता तो हमारी जरूरत ही नहीं पड़ती। हम विश्वास बढ़ाकर दोनों पक्षों को मिलाना चाह रहे थे, उन्होंने नकार दिया। नक्सलियों को सरकार पर जरा सा भी भरोसा नहीं है। यह सिलसिला जारी रहा कई अधिकारियों ने सहयोग दिया, जब झारखण्ड में चुनाव हुआ और शांतिपूर्वक हुआ। वहां हमारे शिक्षकों ने बुलेट टू बैलेट के लिए कार्य किया था। इस कार्य में और तेजी आ सकती थी यदि सरकार अपनी नरमी दिखाती और संपर्क साधने की इच्छा दिखाती।

चिदंबरम ने बात करने की ‘कर्टसी’ भी नहीं दिखाई

sri sri ravi shankar interview on naxal issue

सवाल - ये मदद कब मांगी गई थी, क्या आपने उन्हें कोई पत्र भी लिखा था।

श्री श्री - नहीं मैंने उनसे टेलीफोन पर बात की थी। कई बार प्रयासों के बाद जब उनसे बातचीत हुई तो उनका सीधा सा जवाब था कि आप इसमें न पड़ें सरकार है वही करेगी। उसके बाद भी मैंने कई बार कोशिश की लेकिन एक दीवार जैसी खड़ी कर ली गई थी। यहां तक कि बात करने की ‘कर्टसी’ भी नहीं थी । उनमें उत्तर देने या सुनने की सहनशीलता भी नहीं थी।

सवाल - मोदी सरकार से आपने इस मामले में कोई बात की है, सरकार का रुख कैसा रहा है?

श्री श्री -
वैसे नक्सली ही नहीं, उल्फा, बोडो लैंड से भी बातचीत की जा रही है। असंतुष्टों से बातचीत करना हमारा मुख्य मकसद है और प्रधानमंत्री जी भी चाहते हैं कि बातचीत के माध्यम से समस्या का हल निकाला जाए।

'नक्सली बुरे नहीं, उनके अंदर पीड़ा है'

sri sri ravi shankar interview on naxal issue

सवाल - नक्सली इलाकों में आप क्या और किस तरह का काम कर रहे हैं?

श्री श्री  - हमने झारखण्ड में प्रवास किया वहां पर हमारा एक बहुत बड़ा कार्यक्रम होने वाला था तब नक्सलियों ने बंद का एलान किया था लेकिन हमने नक्सलियों से बात की तो उन्होंने अपना बंद वापस ले लिया। कार्यक्रम में बहुत संख्या में लोग शामिल  हुए। इसके बाद हम लातिहार की जेल भी गए, वहां शिविर कराया गया, उन्हें सुदर्शन क्रिया कराई और इसके बाद आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यकर्ताओं के माध्यम से बुलेट से बैलेट की आवाज वहां बुलंद हुई। इसके बाद वहां कोई नरसंहार नहीं हुआ। इसी तरीके से बिहार के जहानाबाद में भी आर्ट ऑफ लिविंग ने काफी काम किया। एक व्यक्ति ने तो वहां नेतृत्व भी किया। आज भी गांव-गांव में सेवा प्रकल्पों में नक्सली हिंसा के मार्ग को छोड़कर कार्य कर रहे हैं। इससे वह स्वयं भी खुश हैं और समाज भी। नक्सली बुरे नहीं हैं, उनके अन्दर पीड़ा है, दर्द है इसलिए वे अपने जीवन को दांव पर लगाकर हिंसा के मार्ग पर चल रहे हैं। एक किलो चावल को चार बार उबालकर एवं कंदमूल खाकर अपना जीवन तपस्व‌ियों की भांति जी रहे हैं। वे देश के दुश्मन नहीं हैं, मगर उन्हें यदि नई दृष्टि दी जाए तो उन्हें मुख्य धारा में लाया जा सकता है और उनसे समाज के लिए अच्छे कार्य करवाए जा सकते हैं। एक युवा नक्सली वरदान हो सकता है बस उसे अध्यात्म का पता चल जाए। इसी तरीके के छोटे-छोटे प्रयासों से हजारों लोगों को मुख्य धारा में लाया जा रहा है। 2008 से 2010 के बीच में यह कार्य हुआ है। हम नक्सली क्षेत्रों में पाठशालाएं चला रहे हैं। कई पूर्व नक्सली जो बंदूक लेकर घूम रहे थे वह अब हमारी पाठशाला चला रहे हैं। हमारे कुल 424 स्कूल देशभर मे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे हैं। कई नक्सल प्रभावित  क्षेत्रों में बिजली नहीं है, हम उन्हें सोलर लैंप दे रहे हैं । हमने कम समय में 15900 लैंप अभी तक बांटे हैं। हमने कौशल विकास केन्द्रों को विकसित किया है जिसमें प्लम्बर, इलेक्ट्रिशियन, टेलरिंग, ड्राइवर आदि शामिल हैं। देशभर में ऐसे 24 कौशल विकास केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं। वहां कई नक्सलियों को लाकर प्रशिक्षण दिया जाता है और उसके बाद उन्हें नौकरी या कोई काम मिल जाता है। इसके अलावा रसायनमुक्त खेती, आर्गेनिक फार्मिंग का भी प्रशिक्षण हमने प्रारंभ किया है जो अभी शांत‌ि पूर्वक जारी है।

देखिए पूरा इंटरव्यू

sri sri ravi shankar interview on naxal issue

सवाल - छत्तीसगढ़ में आपके प्रयास की दिशा क्या है। इस कार्य में स्थानीय सरकार आपकी किस तरह से मदद कर रही है?

श्री श्री - छत्तीसगढ़ में कौशल विकास केन्द्र जो सरकार चला रही थी लेकिन चला नहीं पाई तो वह जगह हमें लीज पर मिली है। वहां हमारा प्रश‌िक्षण देने का कार्य चल रहा है। वैसे हम किसी सरकार से विशेष मदद नहीं लेते हैं। हम स्वयं अपने कार्य चला रहे हैं। कोई भी सामाजिक कार्य के लिए गैरसरकारी संस्था अच्छे ढंग से काम कर सकती है। सरकार से हमने कोई मदद अभी तक नहीं मांगी है।


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