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प्रभाकरण के बेटे की मौत पर बिफरे करुणानिधि
चेन्नई/एजेंसी
Updated Wed, 20 Feb 2013 07:40 PM IST
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तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टियों ने लिट्टे के दिवंगत प्रमुख वी प्रभाकरण के 12 वर्षीय बेटे बालचंद्रन की कथित नृशंस हत्या को अमानवीय कृत्य बताते हुए श्रीलंका सरकार की कड़ी निंदा की है।
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राज्य की मुख्यमंत्री और एआईडीएमके प्रमुख जयललिता ने केंद्र सरकार से कोलंबो के खिलाफ कदम उठाने को कहा है। साथ ही जिनेवा में मार्च में होने वाली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की बैठक में श्रीलंका के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन संबंधी प्रस्ताव का समर्थन करने को कहा है।
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वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने भी भारत सरकार से प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने यूपीए सरकार पर श्रीलंका में तमिलों के मानवाधिकारों के हनन पर कार्रवाई करने में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।
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श्रीलंका की कार्रवाई को बर्बरता का एक अमानवीय कृत्य करार देते हुए जयललिता ने कहा कि वह एक बच्चा था, जिसने कोई अपराध नहीं किया था। प्रभाकरण का बेटा होने की वजह से उसे सुनियोजित तरीके से मारा गया। यह ऐसी कई अन्य घटनाओं का सबूत है और यह श्रीलंका की मौजूदा सरकार की मानसिकता को दिखाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से कोलंबो के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की।
वहीं दूसरी ओर डीएमके प्रमुख ने कहा कि बालचंद्रन की मौत श्रीलंकाई राष्ट्रपति राजपक्षे को युद्ध अपराधी साबित करने के लिए काफी है। अन्य देशों को अब और अधिक सबूत खोजने की जरूरत नहीं है। इस तरह की नृशंस हत्या का दुनिया के किसी देश में रिकॉर्ड नहीं मिलता है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में श्रीलंका के संबंध में अमेरिका समर्थित प्रस्ताव का कई देशों ने समर्थन किया लेकिन यह दुख की बात है कि भारत ने इस मामले पर कोई आधिकारिक रवैया नहीं दिखाया है।
प्रदेश के लोगों की इच्छा है कि भारत संयुक्त राष्ट्र में इस मसले पर सक्रिय भूमिका निभाएं और श्रीलंका में तमिलों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर बात रखे।