मोदी की 'ऐतिहासिक गलती' से मछुआरा समाज नाराज
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान को लेकर केरल का मछुआरा समुदाय मोदी के विरोध में उतर आया है। केरल के मछुआरा समुदाय की अखिल केरल धीवर सभा नाम की संस्था ने प्रधानमंत्री से दलित नेता अयंकाली पर दिए बयान को गलत बताया है।
सभा के महासचिव वी दिनकरन ने मोदी से गलत बयान के लिए माफी मांगने की मांग की है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार धीवर सभा का कहना है कि केरल के वार्षिक कयाल सम्मेलन में संबोधन में प्रधानमंत्री ने मोदी ने कहा था कि यहां दलित समाज सुधारक नेता अयंकाली ने ही कयाल सम्मेलन की नींव डाली थी जबकि ऐसा नहीं है।
वी दिनकरन ने कहा कि कयाल सम्मेलन की नींव पंडित केपी करुप्पम ने डाली थी। इसलिए कयाल सम्मेलन पर अयंकाली का नाम लेना इतिहास से छेड़छाड़ करना है।
अयंकाली पर कैसे हुआ विवाद?
हाल ही में दिल्ली में समाज सुधारक अयंकाली की 152वीं जयंती मनाई गई। इस जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने दलित समाज सुधारक को याद किया।
समाज के लिए अयंकाली के योगदानों की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि केरल में होने वाले विशाल वार्षिकोत्सव कयाल सम्मेलन की नींव अयंकाली ने ही डाली थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि अयंकाली सम्मेलन महात्मा गांधी के दांडी मार्च जैसा था जिसमें दलितों को न्याय दिलाने की मांग की गई थी।
केरल के मछुआरा समुदाय ने मोदी के बयान को गलत बताया और उनसे गलती के लिए माफी मांगने की मांग कर रहा है।
वी दिनकरन ने कहा कि प्रधानमंत्री को जिसने भी कयाल सम्मेलन के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई होगी उसने केरल के इतिहास को गलत तरीके से पेश किया है। अयंकाली को कयाल सम्मेलन से नहीं जोड़ना चाहिए था।