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साध्वी के बयान ने दिलाई नब्बे के दशक की याद

Wed, 03 Dec 2014 12:29 PM IST
Updated Wed, 03 Dec 2014 12:29 PM IST
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Special Story on Sadhvi Niranjan - Controversial Statement of Sadhvi Niranjan

केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के अभद्र बोल ने नब्बे के दशक के राम मंदिर आंदोलन के वक्त के उग्र बयानों की याद ताजा करा दी है।

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रामजादे की सरकार या हरामजादे की सरकार की संज्ञा देकर निरंजन ने ढाई दशक बाद ऋतंभरा की कमी को पूरा करने का प्रयास किया है। लेकिन अभद्र बोल के कारण साध्वी मोदी सरकार के गले की फांस बन सकती हैं।
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विपक्ष निरंजन को मंत्री पद से हटाने की मांग पर अड़ा है तो उत्तर प्रदेश के मिशन 2017 के मद्देनजर जातीय समीकरण को देखते हुए साध्वी को सरकार में बनाए रखना भाजपा की सियासी मजबूरी है। बताया जाता है कि विहिप नेता अशोक सिंहल के दबाव के चलते निरंजन को मंत्री बनाना पड़ा।
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अभद्र बोल के कारण किनारे लगे कई नेता

Special Story on Sadhvi Niranjan - Controversial Statement of Sadhvi Niranjan

नब्बे के दशक में भी अभद्र बोल के लिए पहचाने जाने वाले नेताओं का हश्र उन्हें याद नहीं रहा होगा। उस वक्त ऐसे ही बयान के लिए पहचाने जाने वाले नेता आज राजनीतिक पटल से गायब हैं।

राममंदिर आंदोलन के वक्त साध्वी ऋतंभरा, विनय कटियार, उमा भारती, अशोक सिंघल, रामविलास वेदांती, साक्षी महाराज सरीखे फायर ब्रांड नेता ऐसे ही बोलों के जरिए जनता में उग्र जोश भरा करते थे।

एक समय था जब इन नेताओं ने अपनी फायर ब्रांड की पहचान बनाई, लेकिन राममंदिर आंदोलन थमने के बाद जनता का इन्हें समर्थन नहीं मिला।

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