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यूपी का खुर्जा बना चीन के लिए चुनौती!

Sun, 26 Oct 2014 06:58 PM IST
Updated Sun, 26 Oct 2014 06:58 PM IST
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special report on pottery production in khurja.
दिल्ली से महज 90 किलोमीटर दूर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर खुर्जा को लोग इसलिए जानते हैं कि वहां चीनी मिट्टी के बर्तन और कुछ सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं।
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लेकिन शायद आपको यह पता न हो कि खुर्जा में बिजली के फ्यूज़ सर्किट, इन्सुलेटर, प्रयोगशाला के उपकरण, हवाई जहाज़, टरबाइन, रॉकेट, न्यूक्लियर फ्यूजन, अंतरिक्ष तकनीक सहित दुनिया की सबसे तेज दौड़ने वाली कारों में इस्तेमाल होने वाले कई कलपुर्जे भी बनाए जाते हैं।
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जहां भारत के दूसरे उद्योग चीन के सस्ते उत्पादों के आगे पानी भरते नजर आ रहे हैं, वहीं खुर्जा का सिरेमिक उद्योग मज़बूती से चीन ही नहीं दुनिया के दूसरे मुल्कों के लिए भी चुनौती बनकर उभर रहा है।
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खुर्जा दे रहा है चीन को मात

special report on pottery production in khurja.

खुर्जा के मुकाबले चीन के उत्पाद बहुत महंगे हैं। चीन अपने यहां प्रमुखता से बोनचाइना उत्पाद तैयार करता है।

बोनचाइना के मुकाबले खुर्जा में स्टोनवेयर, अर्थवेयर, क्वार्ट्ज़ और क्ले के उत्पाद को तवज्जो दी जाती है, जो काफ़ी सस्ते पड़ते हैं।

खुर्जा स्थित छाबड़ा इंडस्ट्रीज़ के मालिक रज़ी अहमद ख़ान ने बताया, "दो-तीन साल पहले मामूली अंतर था लेकिन साल भर पहले केंद्र सरकार ने चीन से आयातित क्रॉकरी पर संख्या के बजाए वजन के आधार पर कर लगाना शुरू कर दिया, जिसका फ़ायदा हमें मिला है।"

सिलिको केमिको पोर्शलिन वर्क्स खुर्जा की उपलब्धि गौर करने लायक है।

इस कंपनी के तकनीक निदेशक गुलजीत सिंह मिनहास के मुताबिक़,"हम अभी तक जगुआर फ़ाइटर प्लेन में इस्तेमाल आने वाले एयरफ़िल्टर का इंग्लैंड से आयात करते थे, जिसकी क़ीमत शायद एक लाख रुपए के आसपास थी पर हम इसे सिर्फ़ सात-आठ हज़ार रुपए में उपलब्ध करा रहे हैं।"

बुलंदियों पर निर्यात

special report on pottery production in khurja.

खुर्जा में बनने वाले बिजली के खंभों पर लगने वाले इन्सुलेटर की गुणवत्ता चीन के मुक़ाबले बेहतर होने से चीन के इन्सुलेटर को यहां बिक्री की अनुमति नहीं मिल पाई।

आरके इंडस्ट्रीज़ के मालिक रवींद्र कुमार गुप्ता ने बताया,"चीन के इन्सुलेटर ज़्यादा तापमान बर्दाश्त नहीं कर पाते, फट जाते हैं। इसलिए उन्हें अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ा।"

नतीजा यह कि अकेले आरके इंडस्ट्रीज़ का सालाना टर्नओवर चार-पांच करोड़ रुपए है। छाबड़ा इंडस्ट्रीज़ के मालिक रज़ी अहमद ख़ान के मुताबिक़ केंद्र सरकार की नीतियों का फ़ायदा खुर्जा को मिला।

खुर्जा में सिरेमिक उद्योग की नींव 14वीं सदी में तैमूर लंग ने रखी थी। सैकड़ों साल के इतिहास में सिरेमिक कारोबार अब यहां की रग-रग में बहने लगा है।

यहां का सालाना कारोबार 100 करोड़ रुपए से ज़्यादा का हो चुका है। लगभग 30 फ़ीसदी कारोबार विदेशों में निर्यात का है। खुर्जा से बांग्लादेश, फ्रांस, श्रीलंका, थाईलैंड, सिंगापुर, जर्मनी, अफ़्रीका, इंग्लैंड आदि देशों में पॉटरी निर्यात की जाती है।

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