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'मीडिया कारोबार से दूर रहें नेता और कॉरपोरेट'

Wed, 13 Aug 2014 01:37 AM IST
Updated Wed, 13 Aug 2014 01:37 AM IST
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Special programme on independence day

समाचारों और विचारों की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों और कॉरपोरेट कंपनियों को न्यूज चैनल और अखबार के कारोबार से दूर रखने की सिफारिश की गई है।

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दूरसंचार नियामक ट्राई ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि धार्मिक संगठनों और केंद्र व राज्य सरकार के विभागों को भी मीडिया कारोबार में नहीं आना चाहिए।

मंगलवार को सौंपी अपनी अहम सिफारिशों में ट्राई ने पेड न्यूज और संपादकीय को प्रभावित करने वाले कदमों पर लगाम कसने के लिए एक स्वतंत्र संस्था बनाने का सुझाव भी दिया है।

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हितों का टकराव हो सकता है

Special programme on independence day

ट्राई ने इसके अलावा यह भी कहा है कि यदि पहले से ही राजनीतिक दल, कॉरपोरेट आदि को मीडिया कारोबार के लिए अनुमति मिल चुकी है, तो उन्हें इस कारोबार से निकलने का विकल्प देना चाहिए।

ट्राई की ओर से जारी सिफारिशों में कहा गया है कि सरकार को मीडिया संस्थान में कॉरपोरेट की हिस्सेदारी पर गंभीरता से कदम उठाना चाहिए, वरना इसके चलते हितों का टकराव हो सकता है।

सरकार न बने नियामक

Special programme on independence day

ट्राई के अनुसार सरकार को मीडिया का नियमन करने की जरूरत नहीं है। इसके लिए एक अथॉरिटी बनाई जानी चाहिए। जो कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया को रेगुलेट करे।

अथॉरिटी में विभिन्न क्षेत्रों के सम्मानित लोगों को शामिल किया जाना चाहिए। जिसमें मीडिया के भी लोग शामिल हों। हालांकि अथॉरिटी में अधिकतम सदस्य मीडिया से बाहर के होने चाहिए।

ट्राई ने इसके अलावा प्रसार भारती की स्वायत्तता को बढ़ावा देने की बात कही है। उसके मुताबिक सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे प्रसार भारती की स्वतंत्रता और स्वायत्तता मजबूत बनी रहे।

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मीडिया की पहुंच के लिए बने इंडेक्स

किसी क्षेत्र में मीडिया की पहुंच और प्रासंगिकता को समझने के लिए ट्राई ने एक इंडेक्स बनाने का सुझाव दिया है। हरफाइंडहल हीर्शमैन इंडेक्स बनाने की सिफारिश ट्राई ने की है।

इसके अलावा क्रॉस मीडिया स्वामित्व की हर तीन साल में समीक्षा करने की भी बात ट्राई ने कही है। ट्राई ने यह भी कहा है कि मीडिया में स्वामित्व को लेकर साल 2009 में सिफारिश की गई थी। लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं की गई है।

ट्राई चेयरमैन के राहुल खुल्लर मीडिया संस्थान के स्वामित्व का मसला बेहद गंभीर है। आप कैसे पता कर सकते हैं कि किसी विधायक या सांसद का चैनल सही खबर दिखा रहा है या खबर को उसके पक्ष में तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहा है।

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