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19 साल चले जयललिता के एक मुकदमे की 19 खास बातें

Mon, 11 May 2015 09:50 PM IST
इमरान कुरैशी / बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
इमरान कुरैशी / बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए Updated Mon, 11 May 2015 09:50 PM IST
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special points of ex cm jailalitha case

कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयराम जयललिता के आय से अधिक संपत्ति के मामले में बरी कर दिया।

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बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने सितंबर, 2014 में उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में चार साल जेल और 100 करोड़ रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई थी। यह मामला मुख्यमंत्री के रूप में उनके पहले कार्यकाल (1991-1996) का है।

19 साल तक चले इस मामले के 19 खास पड़ाव

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1- आय से अधिक संपत्ति का मामला 19 साल पहले 1996 में दायर किया गया था।

2- साल 1991 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जयललिता ने तीन करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी। मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने बस एक रुपए महीना वेतन पर काम किया। उनके ख‌िलाफ आरोप यह है की उनके पास उनके कार्यकाल की समाप्ति तक 66.6 करोड़ रुपए की संपत्ति कैसे हो गई।

3- आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप लगा कि चेन्नई और इसके बढ़ते उपनगरों में उनके पास कई मकान, हैदराबाद में फार्म हाउस, नीलगिरि में चाय बागान, 28 किलो सोना, 800 किलो चांदी, 10500 साड़ियां, 750 जोड़ी जूते, 91 घड़ियां हैं।

यह सब रिजर्व बैंक की बेंगलुरु शाखा में जमा है। आरोप है कि जयललिता, उनकी करीबी साथी शशिकला, उनके दत्तक पुत्र सुधाकरन (जिन्हें उन्होंने बाद में त्याग दिया), शशीकला की भांजी इलावर्सी ने जयललिता के काले धन से 32 कंपनियां शुरू कीं।

4- जयललिता और सभी अभियुक्तों ने आरोपों को गलत बताया। जयललिता ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया और शशिकला ने दावा किया कि उनके परिवार के व्यापार के बारे में जयललिता को कुछ भी नहीं पता था।

5- मुकदमा 1997 में शुरू हुआ। साल 2002 में एक दूसरी एफआईआर में जयललिता पर लंदन में एक होटल की मालिक होने के आरोप लगाए गए। इस मामले को बाद में लंदन होटल केस के रूप में जाना गया।

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क्या हुआ 2001 के बाद

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6- मई 2001 में जयललिता दोबारा सत्ता में आईं। उनके मामलों में एक नया जांच अधिकारी आया जिसने नए सिरे से गवाहों के बयान लिए।

7- सितंबर 2001 में जयललिता की विधानसभा की सदस्यता निरस्त कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के इस फैसले को बरकरार रखा।

अदालत ने उन्हें कोडईकनाल में प्लेजेंट होटल को नियमों के विरुद्ध भवन निर्माण की अनुमति देने का दोषी पाया।

उन्होंने इस्तीफा दे दिया और ओ पनीरसेल्वम को अपनी जगह मुख्यमंत्री बना दिया। छह महीने बाद वो उपचुनाव जीत कर फिर मुख्यमंत्री बन गईं।

8- आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में 259 में से 76 गवाहों ने अपने बयान वापस ले लिए पर सरकारी वकील ने उनके ख‌िलाफ किसी कार्रवाई की अपील नहीं की और जयललिता अदालत में पेश भी नहीं हुईं। अदालत ने उन्हें लिखित उत्तर देने की अनुमति भी दे दी।

9- इसके बाद डीएमके नेता के अंबज़गन सुप्रीम कोर्ट में चले गए और मामले की सुनवाई को तमिलनाडु से बाहर कराने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भेज दिया और विशेष अदालत भी बना दी।

10- लंदन होटल केस और आय से अधिक सम्पत्ति के मामले को चार सालों की क़ानूनी लड़ाई के बाद अलग-अलग कर दिया गया।

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दस्तावेजों का तमिल में अनुवाद

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11- इस बीच 2003- 2005 के बीच बेंगलुरु अदालत के लिए अदालती दस्तावेजों का तमिल से अंग्रेजी में अनुवाद होता रहा। पांच साल बाद जयललिता ने तमाम दस्तावेजों को रद्द कर नए सिरे से अनुवाद कराने की अपील की जिसे हाई कोर्ट से ठुकरा दिया गया।

12- साल 2011 में जयललिता के वकीलों ने अनुवादों में सुधार की मांग की। साथ ही उन्होंने विशेषज्ञ अनुवादक की भी मांग की ताकि गवाहों के साथ जिरह की जा सके।

अदालत ने अनुवादक नियुक्त किया तो जयललिता के वकीलों ने अनुवादक से ही जिरह करने की अनुमति चाही। बाद में उन्होंने अनुवाद में गलतियों को सुधरवाने के लिए छह महीने का समय भी मांगा।

13- कभी किसी कारण से कभी किसी कारण से जयललिता के वकील अलग-अलग अदालतों में आवेदन देते रहे।

14- विशेष अदालत में कार्रवाई रुकवाने के लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई बार आवेदन लगाए गए। 2013 में विशेष अदालत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नियुक्त वकील ने अपने ऊपर लगातार डाले जा रहे दबाव की बात करते हुए हुए इस्तीफ़ा दे दिया।

15- कर्नाटक की तात्कालिक भाजपा सरकार ने नया सरकारी वकील नियुक्त कर दिया, बाद की कांग्रेस सरकार ने उस नए वकील को हटाया तो जयललिता अदालत पहुँच गईं और उसी वकील को दोबारा नियुक्त करने की मांग की।

16- जयललिता को इस बीच विशेष अदालत ने ख़ुद हाज़िर होने को कहा ताकि उनसे सवाल जवाब किए जा सकें। वो सुप्रीम कोर्ट चली गईं जहां उनकी बात नहीं सुनी गई। फिर उन्होंने सुरक्षा का सवाल उठाया तो कर्नाटक को विशेष अदालत को दूसरी इमारत में भेजना पड़ा।

17- सितंबर, 2014 में विशेष अदालत ने जयललिता और तीन अन्य अभियुक्तों को दोषी माना और सजा सुनाई। जयललिता को चार साल जेल और 100 करोड़ जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। उनकी जगह उनकी पार्टी के पुराने वफादार नेता ओ पनीरसेल्वम राज्य के मुख्यमंत्री बने।

18- जयललिता ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए विशेष अदालत की सजा को निलंबित कर दिया।

19- 11 मई 2015 को हाई कोर्ट ने जयललिता की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाते हुए उन्हें इस मामले में सभी अभियुक्तों के साथ बरी कर दिया।

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