कोयला घोटाले में मनमोहन का बयान दर्ज करने का आदेश
कोयला घोटाले की आंच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चौखट तक पहुंच गई है। विशेष अदालत ने सीबीआई को कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बयान दर्ज करने का आदेश दिया है।
मामले में आरोपी पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की भूमिकाओं की जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
सीबीआई बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को कोयला खदान आवंटित करने में हुई अनियमितताओं की जांच कर रही है। केंद्र सरकार ने जब खदान आवंटित की थी, उस समय कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ही पास था।
हालांकि सीबीआई ने जांच में कोई गड़बड़ी नहीं पाई और मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। लेकिन अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
27 जनवरी तक कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी
विशेष अदालत ने मामले की जांच आगे बढ़ाने का आदेश दिया। अदालत ने सीबीआई से कहा कि मामले में उस समय के कोयला मंत्री का बयान भी दर्ज होना चाहिए। अदालत ने जांच एजेंसी को मामले में 27 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा।
विशेष अदालत ने 25 नवंबर को सीबीआई से मामले में मनमोहन सिंह के बयान की बावत पूछा भी था। अदालत ने कहा कि था हिंडाल्को को कोयले की खदाने जब आवंटित की गई, उस समय मनमोहन सिंह कोयला मंत्री थे। क्या उनका बयान मामले में दर्ज किया गया?
मनमोहन सिंह के पास 2005 में कोयला मंत्रालय था और उसी समय हिंडाल्को को ओडीसा की तलाबिरा एक और तलाबिरा दो खदाने आवंटित की गई थी, बाद में जिसके आवंटन में अनियमितताएं पाई गईं।