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किंतु-परंतु के साथ सपा यूपीए को बचाएगी?

Wed, 20 Mar 2013 01:03 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 20 Mar 2013 01:03 PM IST
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sp will support upa with ifs and buts after dmk pull out

द्रमुक के सियासी झटके से सहमी मनमोहन सरकार की सपा और बसपा पर निर्भरता बढ़ गई है। हालांकि सपा महासचिव राम गोपाल यादव के ताजा बयान से यूपीए सरकार के कर्ताधर्ताओं की चिंता थोड़ी होगी।

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सपा महासचिव राम गोपाल यादव ने कहा कि कांग्रेस सरकार की यह हालत अपनी गलतियों की वजह से हुई है। यदि कांग्रेस ने अपनी गलतियां नहीं सुधारी तो भविष्य में उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि उसकी स्थिरता को कोई खतरा नहीं है।
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पुराना इतिहास
वैसे समाजवादी पार्टी के पुराना इतिहास देखा जाए तो उसने कई अहम मौके पर सरकार की नैया पार लगाई है। भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर लेफ्ट के केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद सपा ने सरकार को समर्थन दिया था।

राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी समाजवादी पार्टी ने यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया। सपा के समर्थन से प्रणब मुखर्जी की दावेदारी और मजबूत हो गई थी।

वहीं उपराष्ट्रपति चुनाव में भी सपा ने यूपीए प्रत्याशी हामिद अंसारी को समर्थन दिया था।

सीबीआई का डर?
कहा जाता है कि केंद्र सरकार सपा को सीबीआई का डर दिखाती रहती है। एक बार तो सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी केंद्र पर सीबीआई के जरिए धमकाने का आरोप लग चुके हैं।

मुलायम ने कहा था कि सरकार के पास केवल दो मुद्दे हैं- सीबीआई के जरिये विपक्ष को धमकाना और इनकम टैक्स के बहाने आर्थिक आधार पर दबाना। सरकार दोनों एजेसियों का दुरुपयोग कर रही है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सपा सरकार को चेतावनी देती रहेगी लेकिन वह समर्थन वापस नहीं लेगी।

बेनी पर सख्त, लेकिन सरकार को देती रहेगी समर्थन
भले ही सपा केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के इस्तीफे पर अड़ी हो, लेकिन उसने कभी नहीं कहा कि वह इस मुद्दे पर मनमोहन सरकार से समर्थन वापस लेगी।


उल्लेखनीय है कि बेनी प्रसाद वर्मा ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसको लेकर काफी हंगामा हुआ था।

यूपीए का सियासी आंकड़ा
आंकड़ों की लिहाज से देखे तो 18 सांसदों वाली द्रमुक के समर्थन वापस लेने के बाद यूपीए के पास 233 सांसद हैं। इनमें कांग्रेस के 203, एनसीपी के 9, रालोद के 5 और अन्य दलों के 16 सांसद हैं।

बाहर से समर्थन दे रहे सपा(22), बसपा(21), राजद(4) और जेडीएस(3) को मिलाकर देखे तो यह आंकड़ा 283 हो जाता है। इस प्रकार सपा के 22 सांसद यूपीए सरकार की स्थिरता के लिए बेहद अहम हैं।

हालांकि बहुमत (271) मनमोहन सरकार के साथ है और सरकार पर कोई संकट नहीं दिखता। पी. चिदंबरम और कमलनाथ ने भी कहा है कि सरकार की स्थिरता को कोई खतरा नहीं है।

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