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खामोश हो गई समाजवाद की बेबाक जुबान
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 23 Sep 2013 12:29 AM IST
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद मोहन सिंह का दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया।
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एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि मोहन सिंह ने रविवार शाम करीब सबा चार बजे अंतिम सांस ली।
वे ब्लड कैंसर से पीड़ित थे और पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्हें 19 सितंबर को एम्स के कैंसर विभाग में भर्ती कराया गया था।
उनके निधन की खबर से दिल्ली, लखनऊ के सपा नेता ही नहीं बल्कि समाजवादी विचारधारा से जुड़े देशभर के लोग सदमे में आ गए।
सर्वाधिक हलचल उनकी जन्मभूमि और कार्यस्थली कही जाने वाली देवरिया में हुई। देवरिया के बरहज निवासी मोहन सिंह अपनी बेबाक बयानी और सादगी को लेकर 45 वर्षों के समाजवादी सफर में हमेशा लोगों के दिल और जेहन में अलग जगह बनाए रहे।
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चार मार्च 1945 को जन्मे मोहन बाबू ने 1968 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ का अध्यक्ष निर्वाचित होकर अपने सियासी जीवन की शुरुआत की थी।
वे 1977 में जनता पार्टी से बरहज विधानसभा क्षेत्र के विधायक चुने गए। 1978 में बनारसी दास की सरकार में वे उत्तर प्रदेश के लघु उद्योग राज्यमंत्री रहें।
1980 में वे फिर बरहज से ही लोकदल के टिकट पर विधायक चुने गए और उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक बने।
1990 में देवरिया कुशीनगर स्थानीय निकाय से एमएलसी बने। 1991,1998 और 2004 में देवरिया संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए।
2010 में मोहन सिंह को सपा ने राज्यसभा सदस्य बनाया। 2008 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के सम्मान से भी नवाजा गया था।
कल होगा अंतिम संस्कार
समाजवादी चिंतक एवं राज्यसभा सांसद मोहन सिंह का अंतिम संस्कार मंगलवार को उनके पैतृक गांव बरहज में होगा, जबकि उनका शव सोमवार को ही देवरिया पहुंच जाएगा।
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक उनका शव विशेष विमान से सोमवार को पहले लखनऊ लाया जाएगा। लखनऊ गोमती नगर स्थित उनके आवास और समाजवादी पार्टी कार्यालय पर श्रद्धांजलि सभा के बाद उनका उनका शव गोरखपुर हवाई अड्डे पर पहुंचेगा।
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गोरखपुर से सड़क मार्ग द्वारा उनका शव देवरिया स्थित उनके आवास पर रखा जाएगा। अगले दिन मंगलवार को उनके पैतृक गांव बरहज में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पांच भाइयों में सबसे बड़े मोहन सिंह के दो बेटियां कनक लता और रीता सिंह हैं। रविवार शाम उनके निधन की खबर से देवरिया जिला ही नहीं पूरा पूर्वांचल शोक में डूब गया।